तालाब में तैरती दिखीं हजारों मरी मछलियां.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)ये बात सही है कि मछलियों का जीवन पानी है. पानी के बाहर आते ही मछली मर जाएगी. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि मछली पानी के अंदर नहीं मरेगी. अगर मछलियों की देखभाल में जरा सी भी लापरवाही हुई तो यही पानी उसके लिए मौत भी बन जाता है. ये हम नहीं खुद फिशरीज एक्सपर्ट कहते हैं. एक्सपर्ट की मानें तो मछलियों के तालाब का पानी ज्यादा ठंडा या गर्म हुआ तो मछली बीमार पड़ जाती हैं. पानी में आक्सीजन की कमी हुई तो मछलियों की मौत तक हो जाती है. पानी अगर प्रदूषित हो जाए तो भी मछलियां मरने लगती हैं. इसलिए मछलियों के साथ-साथ तालाब के पानी की हैल्थ को भी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है.
इसलिए खासतौर से बदलते मौसम के साथ ही बहुत ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत होती है. इसी को देखते हुए गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (Gadvasu), लुधियाना में कॉलेज ऑफ फिशरीज की तीन खास टिप्स अपनाने की सलाह दी जाती है. खासतौर से ठंडे होते मौसम में मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए तालाब की साफ-सफाई, मछलियों के खानपान और तालाब के पानी पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.
फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दियों के दौरान किसानों को तालाब के पानी की गहराई छह फीट तक रखनी चाहिए. जिससे मछलियों को गर्म वातावरण में रहने के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी. इतना ही नहीं तालाब के नीचे के हिस्से और सतह के पानी को गर्म रखने के लिए शाम के समय ट्यूबवेल का पानी तालाब में जरूरत मिलाएं. खासकर जब तालाब के पानी का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो. और एक खास बात ये कि अगर तालाब के आसपास पेड़ हों तो सर्दियों के दौरान उन्हें काट दें. ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे सीधी धूप तालाब पर पड़ सके और पत्तियां भी तालाब में न गिरें. पत्तीा गिरने से पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है.
एक्सपर्ट की मानें तो सर्दियों के दिन छोटे होते हैं और ऊपर से उस दौरान सूरज की रोशनी भी इतनी नहीं आती है जितनी गर्मियों में आती है. यही वजह है कि खराब रोशनी की वजह से तालाब के पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. लगातार बादल छाए रहने से तो हालात और भी खराब हो जाती है. इसलिए ऐसे वक्त में मछली पालकों का काम थोड़ा बढ़ जाता है.
ऐसे में तालाब में आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए पम्प का ताजा पानी तालाब में मिला दें या फिर तालाब में एरेटर का इस्तेमाल करें. सुबह के वक्त एरेटर का इस्तेमाल जरूर करें. सर्दियों में लगातार बादल छाए रहने के दौरान पानी में पीएच की स्तर की भी नियमित निगरानी करनी चाहिए. अगर तालाब के पानी का पीएच 7.0 से नीचे चला जाए तो फौरन ही दो किश्तों में 100 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से तालाब में चूना डाल दें.
एक्सपर्ट के हिसाब से जैसे ही ये पता चले कि तापमान लगातार कम हो रहा है तो मछलियों की खुराक भी कम कर दें. क्योंकि घटते तापमान के साथ ही मछलियों की खुराक भी कम हो जाती है. इसलिए एक बार में तो नहीं, लेकिन धीरे-धीरे मछलियों की खुराक को 25 से 75 फीसद तक कम कर दें. और आखिर में जब पानी का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला जाए तो खुराक को बिल्कुल ही बंद कर दें. असल में होता ये है कि जो दाना हम तालाब में मछलियों के लिए डालते हैं वो पानी में बचता जरूरत है. क्योंकि सर्दी में मछलियां पूरा दाना नहीं खा पाती हैं. और यही बचा हुआ दाना तालाब की तली में जमा होकर गंदगी फैलाता है.
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