EL-Nino: बदलते मौसम से नहीं होंगे बीमार, पशुओं को वैक्सीन लगवाने में रखें ये ख्याल 

EL-Nino: बदलते मौसम से नहीं होंगे बीमार, पशुओं को वैक्सीन लगवाने में रखें ये ख्याल 

आज ज्यादातर देश एएमआर फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड कर रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक इसका एक मात्र इलाज ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाए. और ये तभी मुमकिन है जब पशु बीमार न हों. और ये मुमकिन होगा पशुओं के टीकाकरण से. इससे होता ये है कि टीका लगने से पशु बीमारी की चपेट में नहीं आता है.  

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EL-Nino: बदलते मौसम से नहीं होंगे बीमार, पशुओं को वैक्सीन लगवाने में रखें ये ख्याल पशु टीकाकरण. (फाइल फोटो)

जून में गर्मी अपने चरम पर होती है. इसमे कुछ नया नहीं है, ये हर साल होता है. लेकिन इस बार जून में मौसम कुछ खास रहेगा. और इसकी वजह है अल नीनो. खबर आ रही है कि अल नीनो के असर के चलते बारिश कम होगी और गर्मी ज्यादा तेज पड़ेगी. इस तरह का मौसम खासतौर से पशुओं के लिए बहुत खराब बताया जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो मौसम में आने वाला बदलाव पशुओं को बीमार करता है. पशुओं को होने वाली बीमारी उनके उत्पादन पर भी असर डालती है. और इसका असर डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट पर भी पड़ता है. लेकिन, अगर वक्त रहते पशुओं का वैक्सीनेशन (टीकाकरण) करा लिया जाए तो फिर इस तरह की परेशानियों से पशुओं को बचाया जा सकता है. 

लेकिन वैक्सीनेशन कराने के लिए जरूरी है कि कुछ उपायों का पालन किया जाए. अगर टीकाकरण कराते वक्त एनिमल एक्सपर्ट की बातों का ख्याल रखा तो इसका बड़ा फायदा मिलेगा. क्योंकि एनिमल प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट में आज सबसे बड़ा इश्यू एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का है. पशुओं की बीमारी की हालत में दी जाने वाली एंटी बायोटिक्स दवाई के चलते प्रोडक्ट दूषि‍त हो रहे हैं. 

टीका लगवाने के ये हैं फायदे 

  1. पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव.
  2. पशुओं में होने वाली महामारी से बचाव.
  3. पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव.
  4. बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव.
  5. एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव.
  6. किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ता है.

टीका लगवाने से पहले करें ये काम 

  • प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
  • टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
  • टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है. 
  • बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए. 
  • बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए. 
  • रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
  • मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए. 
  • जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
  • गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
  • टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
  • टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें. 
  • टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें.

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