जंगली मक्खी का कहर! 5 भैंसों की मौत से पशुपालकों में दहशत, प्रशासन से मुआवजे की मांग

जंगली मक्खी का कहर! 5 भैंसों की मौत से पशुपालकों में दहशत, प्रशासन से मुआवजे की मांग

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जंगली मक्खी का प्रकोप पशुपालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. जिले के कई क्षेत्रों में जंगली मक्खी के हमलों से पांच भैंसों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य पशु घायल हैं. इससे चिंतित पशुपालकों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है.

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जंगली मक्खी का कहर! 5 भैंसों की मौत से पशुपालकों में दहशत, प्रशासन से मुआवजे की मांगभैंसों की मौत से पशुपालकों में दहशत

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जंगली मक्खी का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. जिले के जैसर, सीमार और कनस्यारी क्षेत्रों में जंगली मक्खी के हमलों से अब तक पांच भैंसों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य पशु घायल हैं. लगातार हो रहे हमलों से पशुपालकों में डर का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इन गांवों में अधिकांश परिवारों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है. दूध बेचकर और पशुपालन से मिलने वाली आय से ही कई परिवारों का खर्च चलता है. ऐसे में जंगली मक्खी के अचानक बढ़े प्रकोप ने उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है. पशुओं की मौत और बीमारी के कारण किसान काफी परेशान हैं और सरकार से जल्द राहत की मांग कर रहे हैं.

जंगली मक्खी के आतंक से भारी नुसकान

स्थानीय किसान सुनील पाण्डेय ने बताया कि उनके पास पशुपालन के अलावा आय का कोई दूसरा साधन नहीं है. उन्होंने कहा कि जंगली मक्खी के आतंक से ग्रामीणों को भारी नुकसान हो रहा है. कई पशु बीमार हैं और कुछ की मौत भी हो चुकी है. उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन पशुपालकों के पशुओं की मौत हुई है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि उनका आर्थिक नुकसान कुछ हद तक कम हो सके.

जंगली मक्खी के काटने के क्या है लक्षण

इस मामले में पशुचिकित्सक डॉ. शिव कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में जंगली मक्खियों की संख्या सामान्य से अधिक बढ़ जाती है. इन मक्खियों के काटने से पशुओं के खून में संक्रमण फैल सकता है. संक्रमण बढ़ने पर पशुओं को तेज बुखार आता है, और वे चारा खाना बंद कर देते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर उनकी मौत भी हो सकती है. डॉ. शिव कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालन विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव जाकर बीमार पशुओं का प्राथमिक उपचार कर रही हैं. जरूरत के अनुसार टीकाकरण भी किया जा रहा है. इसके अलावा संक्रमित पशुओं के खून के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि संक्रमण की सही पहचान कर प्रभावी इलाज किया जा सके.

जंगली मक्खी से बचने के लिए ये उपाय अपनाएं

पशुचिकित्सक डॉ. शिव कुमार ने पशुपालकों से अपील की कि वे बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतें. पशुओं को रात के समय खुले में न छोड़ें, बल्कि सुरक्षित स्थान पर रखें, जहां पशु बांधे जाते हैं, वहां साफ-सफाई बनाए रखें और आसपास पानी जमा न होने दें. वहीं, अगर किसी पशु को तेज बुखार आए, और वह चारा खाना छोड़ दे या उसकी तबीयत अचानक खराब हो जाए तो बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्साधिकारी को सूचना दें.

पशुपालकों की मुआवजे सहित ये हैं मांग

पशुपालन विभाग का कहना है कि सूचना मिलते ही विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर पशुओं का इलाज करेगी और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगी. वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में जंगली मक्खियों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने, दवा का छिड़काव कराने और जिन पशुपालकों के पशुओं की मौत हुई है उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पशुपालकों को और बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है. (जगदीश चंद्र पांडेय की रिपोर्ट)

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