Animal Vaccination: न इलाज-दवाई पर खर्च होगा और न ही AMR जैसी बड़ी परेशानी आएगी, करें ये काम 

Animal Vaccination: न इलाज-दवाई पर खर्च होगा और न ही AMR जैसी बड़ी परेशानी आएगी, करें ये काम 

Animal Vaccination भारत से एनिमल प्रोडक्ट एक्सपोर्ट नाम मात्र का होने के पीछे की बड़ी वजह एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR). पशुओं की बीमारी की हालत में दी जाने वाली एंटी बायोटिक्स दवाई के चलते प्रोडक्ट दूषि‍त हो रहे हैं. जबकि इंटरनेशन मार्केट ज्यादातर खरीदार देश AMR फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड करने लगे हैं.  

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Animal Vaccination: न इलाज-दवाई पर खर्च होगा और न ही AMR जैसी बड़ी परेशानी आएगी, करें ये काम  Only high-risk drugs—those with potentially serious side effects or stricter safety requirements—would still need a full licence.

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) किसी एक देश की परेशानी नहीं है. जो भी देश एनिमल प्रोडक्ट का उत्पादन कर रहे हैं वो इससे जरूर परेशान होंगे. भारत का डेयरी और मीट सेक्टर इससे खासा परेशान है. ये वो परेशानी है जिसके चलते न तो एनिमल प्रोडक्ट के अच्छे दाम मिलते हैं और न ही प्रोडक्ट एक्सपोर्ट होता है. हमारा देश दूध उत्पादन में भारत पहले नंबर पर है. अंडा उत्पादन में दूसरे और चिकन में चौथे नंबर पर हैं. बफैलो मीट उत्पादन में भी भारत ने कई बड़े देशों को पीछे छोड़ा हुआ है. लेकिन एक्सपोर्ट की बात करें तो बफैलो मीट को छोड़कर चिकन तो एक्सपोर्ट ही नहीं होता है. 

अंडा-दूध की बात करें तो एक्सपोर्ट न के बराबर सिर्फ कागजों पर दर्ज करने लायक है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो AMR का एक इलाज सिर्फ ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाएं. और ये तभी मुमकिन होगा जब पशु बीमार ही न हो. और इसके लिए जरूरी है कि पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण कराया जाता रहे. इससे होता ये है कि टीका लगने से पशु बीमारी की चपेट में नहीं आता है. 

टीकाकरण कराने के हैं कई फायदे 

  1. पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव.
  2. पशुओं में होने वाली महामारी से बचाव.
  3. पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव.
  4. बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव.
  5. एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव.
  6. किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ता है.

टीकाकरण कराने से पहले के टिप्स 

  • प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
  • टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
  • टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है. 
  • बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए. 
  • बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए. 
  • रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
  • मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए. 
  • जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
  • गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
  • टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
  • टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें. 
  • टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें. 

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