Tips for Animal Shed: पशु पालन के लिए शेड बनवा रहे हैं तो बहुत काम आएंगी एक्सपर्ट की ये टिप्स 

Tips for Animal Shed: पशु पालन के लिए शेड बनवा रहे हैं तो बहुत काम आएंगी एक्सपर्ट की ये टिप्स 

Tips for Animal Shed अगर पशुओं का एनिमल शेड नियम मुताबिक नहीं बना होगा तो फिर इसका सीधा असर पशुओं के उत्पादन और उनकी सेहत पर पड़ेगा. पशु गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरी, अगर वो खुश हैं और आराम से रह रहा है तो उसका दूध और मीट उत्पादन कभी नहीं घटता है. बल्कि अच्छे वातावरण में रहने के चलते उसका उत्पादन बढ़ जाता है.

Advertisement
Tips for Animal Shed: पशु पालन के लिए शेड बनवा रहे हैं तो बहुत काम आएंगी एक्सपर्ट की ये टिप्स 

अगर कुछ लोगों को छोड़ दें तो आज भी पशुपालन में लोगों का ये मानना होता है कि पशु को तो कहीं भी खूंटे से बांधा जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं है. खासतौर पर जब पशु शेड में होता है तो उसे आराम की बहुत जरूरत होती है. और पशु को जब पूरा आराम मिलेगा तभी वो तनाव से मुक्त रहेगा. एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक ये ठीक उसी तरह है जैसे पशुपालक अपने रहने के लिए मकान बनवाते वक्त हर एंगिल से दिशाओं का ख्याल रखता है. कहां किचिन होगा और किस दिशा में बेडरूम और बॉशरूम. इसी तरह से पशुओं के लिए शेड बनवाते वक्त भी दिशाओं का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. 

पशु जिस नांद में भूसा और चारा खाते हैं तो उसकी भी लम्बाई-चौड़ाई और किस दिशा में बनी है इसका खास ख्याल रखना चाहिए. एनिमल शेड अगर एक्सपर्ट की मदद से बनवाया जाए तो उसमे पशुओं को उन्हें आराम मिलेगा, वो उसमे खुश रहेंगे. और जब आराम मिलेगा और तनाव मुक्त रहेंगे तो उनका दूध उत्पादन भी बढ़ेगा. इसलिए शेड ऐसा होना चाहिए कि पशुओं को शेड के अंदर घूमने-फिरने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. 

एनिमल शेड में दिशाओं का इस्तेमाल  

लंबाई (Length)
उत्तर-दक्षिण (North-South) यह दिशा शेड की लंबाई के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. 

चौड़ाई (Width)
पूर्व-पश्चिम (East-West) यह दिशा शेड की चौड़ाई के लिए अच्छी मानी जाती है.

इस दिशा के फायदे

  • सुबह और शाम की धूप दोनों तरफ मिलती है.
  • फर्श जल्दी सूखता है, नमी कम रहती है.
  • मक्खी, मच्छर और कीट कम होते हैं.
  • प्राकृतिक वेंटिलेशन बेहतर रहता है.
  • पशु ज्यादा आराम में रहते हैं.
  • पशुओं में रोगों का खतरा घटता है.
  • दूध उत्पादन-गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है.
  • शाम की धूप पश्चिम से आती है.
  • सुबह की धूप पूर्व से आती है.

ऐसा हो नांद का डिजाइन 

  • भैंस का शेड तीन तरफ से पांच फीट ऊंची दीवार से घिरा होना चाहिए.
  • शेड में जहां नांद बनाई जाए वहां दीवार नहीं होनी चाहिए. 
  • ख्याल रहे कि नांद हमेशा उत्तर दिशा में बनानी चाहिए. 
  • नांद का डिजाइन ऐसा होना चाहिए जिसमे आसानी से चारा डाला जा सके. 
  • जवान भैंस के लिए नांद की जमीन से ऊंचाई 50 सेमी और बछड़ों के लिए 20-25 सेमी होनी चाहिए.
  • भैंस और बछड़ों के लिए नांद की गहराई 40 और 20 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
  • शेड के अंदर बने नांद के पास पांच फीट चौड़ा, बिना फिसलन वाला, आसानी से साफ होने वाला और थोड़ा ढलान वाला फर्श बनवाया जाना चाहिए.

नोट-

स्थानीय जलवायु, भू-आकृति और उपलब्ध जगह के मुताबिक शेड की दिशा में हल्का बदलाव किया जा सकता है, लेकिन शेड की लंबाई उत्तर-दक्षिण और चौड़ाई पूर्व-पश्चिम में रखना सबसे अच्छा माना जाता है.

ये भी पढ़ें:-

Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच 

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

POST A COMMENT