Pregnant Animal: गाय-भैंस गाभि‍न हो तो तुरंत ही शेड और फीड में कर लें बदलाव, ये हैं टिप्स 

Pregnant Animal: गाय-भैंस गाभि‍न हो तो तुरंत ही शेड और फीड में कर लें बदलाव, ये हैं टिप्स 

Pregnant Animal गाय-भैंस गर्भ से है या नहीं इसका पता हर 20-21 दिन में इस तरह से लगाया जा सकता है कि अगर वो हीट में नहीं आए तो समझ लें कि भैंस गाभि‍न हो चुकी है. अगर इसमे जरा भी शक हो तो एक बार नजदीकी पशु चिकित्सक से भी सलाह ले सकते हैं.

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Pregnant Animal: गाय-भैंस गाभि‍न हो तो तुरंत ही शेड और फीड में कर लें बदलाव, ये हैं टिप्स 

गाय-भैंस के गाभि‍न होते ही उसमे कई बदलाव आ जाते हैं. सबसे पहले खुराक बदल जाती है. गाभि‍न पशु रोजाना वाली खुराक को नहीं खाता है. इसके साथ ही जरूरत होती है कि उसके शेड में भी बदलाव किया जाए. क्योंकि कई बार उबड़-खाबड़ शेड में चलने-फिरने से पशु का गर्भपात तक हो जाता है. चोट लगने की संभावना भी बनी रहती है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गर्भकाल के दौरान पशुओं को भी खास देखभाल की जरूरत होती है. गर्भकाल के दौरान जरा सी भी लापरवाही बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. 

वहीं पशु गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, उसके साथ जुड़ा दूध उत्पादन उसके बच्चा देने के बाद ही शुरू होता है. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि ब्यांत में ज्यादा और अच्छी फैट का दूध लेने के लिए गर्भकाल के वक्त से ही उसकी देखभाल के साथ ही उसे अच्छी खुराक खाने में दी जाए. तभी गाय-भैंस बच्चा भी हेल्दी देगी और दूध भी ज्यादा देगी. भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है तो इस पूरे गर्भकाल के दौरान पशुओं को खास देखभाल की जरूरत होती है.

गाभि‍न भैंस को इसलिए चाहिए अच्छी खुराक

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो जब भैंस गाभि‍न होती है तो उसे अपने भरण-पोषण के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी खुराक की जरूरत होती है. और खासतौर पर जब आखि‍री तीन महीने चल रहे होते हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे की बढ़वार बहुत तेजी से होती है. और सबसे खास बात ये कि इसी महीने में भैंस अगली ब्यांत में दूध देने के लिए अपने को तैयार करती है. अगर इस दौरान खुराक देने में जरा सी भी ऊंच-नीच होती है तो उसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. साथ ही भैंस और बच्चे को कई तरह की परेशानियां भी होने लगती हैं. इसलिए जरूरी है कि भैंस की खुराक में गर्भावस्था के समय 40-50 ग्राम खनिज लवण मिश्रण जरूर शामिल करना चाहिए.

खुराक में कमी से होंगी ये परेशानियां

  • खुराक कम रह जाने पर बच्चा कमजोर पैदा होता है. 
  • खुराक में जरूरी पोषक तत्व ना हो तो बच्चा अंधा भी हो सकता है.
  • पोषक तत्वों की कमी के चलते ही भैंस फूल दिखा सकती है.
  •  बच्चा देने के बाद भैंस को मिल्क फीवर हो सकता है.
  • जेर गिरने में परेशानी होती है और कई बार तो रूक जाती है.
  • बच्चेदानी में जख्म होने के साथ मवाद पड़ जाता है. 
  • ब्यांत का दूध उत्पादन भी घट जाता है.

गाभि‍न गाय-भैंस का ऐसा हो शेड 

  • 8वें महीने से गाभिन भैंस के लिए अलग से शेड तैयार करें. 
  • भैंस के शेड में जमीन उबड़-खाबड़ और फिसलन वाली नहीं होनी चाहिए. 
  • शेड ऐसा हो जहां भैंस को सर्दी, गर्मी और बरसात से बचाया जा सके. 
  • शेड में हवा के लिए खि‍ड़की जरूर होनी चाहिए. 
  • शेड में जमीन कच्ची हो और रेत भी पड़ा हो. 
  • शेड के अंदर सीलन नहीं होनी चाहिए. 
  • शेड के पास ही पीने का साफ पानी भी हो.

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