Pandemic Fund: पशुओं से इंसानों में फैलती हैं ये पांच महामारियां, संक्रमण रोकने की कोशिश में जुटा भारत

Pandemic Fund: पशुओं से इंसानों में फैलती हैं ये पांच महामारियां, संक्रमण रोकने की कोशिश में जुटा भारत

कोरोना के बाद से जूनोटिस बीमारियों (पशुओं से इंसानों को होने वालीं) से निपटने के लिए महामारी निधि परियोजना (पेंडेमिक फंड) G20 महामारी निधि के तहत दिया जाता है. भारत को भी देश में नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. इसके तहत किसी भी महामारी की निगरानी और उसे कंट्रोल करना अहम होगा. 

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Pandemic Fund: पशुओं से इंसानों में फैलती हैं ये पांच महामारियां, संक्रमण रोकने की कोशिश में जुटा भारतपशुओं में फैलने वाली महामारी को कंट्रोल करने के लिए पेंडेमिट फंड पर काम शुरू हो रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना समेत छह महामारी को इमरजेंसी घोषि‍त किया है. इसमे से पांच ऐसी बीमारियां हैं जो पशु द्वारा होती हैं. इसीलिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) के तहत दुनियाभर में काम चल रहा है. इसी कड़ी में भारत में भी इस अभि‍यान की शुरुआत हो चुकी है. एनिमल हसबेंडरी से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि इस मिशन से मानव और पशुओं की हैल्थ तो सुधरेगी ही साथ में देश की अर्थव्यवस्था को भी सुधार जा सकेगा. क्योंकि हमारे देश में पशुपालन की मदद से गरीब वर्ग के स्तर को उठाने के लिए एक अभि‍यान के तौर पर काम हो रहा है. 

जबकि पशुओं में महामारी के रूप में होने वाली बीमारी इस अभि‍यान को धक्का पहुंचा सकती है. बड़ा खतरा जूनोटिक बीमारियों (पशुओं से इंसानों को होने वालीं) का है. इसी की रोकथाम के लिए भारत में इस अभि‍यान को एशियाई विकास बैंक (ADB), खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और WHO मदद कर रहे हैं. इसके लिए भारत को 25 मिलियन डॉलर यानि करीब 200 करोड़ रुपये का बजट मिला है. 

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देश में ऐसे काम करेगा ये अभियान 

एनिमल हसबेंडरी कमिशन अभि‍जीत मित्रा ने बताया कि पेंडेमिक फंड महामारी की रोकथाम, तैयारी और रेस्पांस करने के साथ ऐसे रिसोर्स भी तैयार करेगा जो निवेश बढ़ाने, भागीदारों के बीच समन्वय बढ़ाने और इसे बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा. इस परियोजना का उद्देश्य पशु स्वास्थ्य खतरों को रोकने, बीमारी का पता लगाने और उनका इलाज करने की क्षमता को देश में बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही परियोजना के तहत बीमारी की सर्विलांस, अर्ली वर्निंग सिस्टम को मजबूत करना, लैब नेटवर्क को मजबूत बनाना और डेटा सिस्टम में सुधार करना  प्रमुख होगा.

वहीं डेयरी सचिव अलका उपाध्याय ने बताया कि किसी भी महामारी के दौरान सीमा पार के केस एक बड़ी परेशानी बनते हैं. इसके लिए भी अभि‍यान में काम किया जाएगा. कोऑर्डिनेशन बनाने के लिए बैठकें की जाएंगी. कुल मिलाकर इस अभि‍यान का सबसे बड़ा मकसद ये है कि कोई बीमार जानवर (पालतू और वन्यजीव) मानव आबादी में ना फैले, जिससे कमजोर आबादी के स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा और आजीविका को खतरा हो. इसके लिए भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है-

  1. लैब सिस्टम के नेटवर्क को बढ़ाना- यह पशु स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को उन्नत और विस्तारित करने और प्रयोगशाला नेटवर्क विकसित करने पर काम करेगा. 
  2. सर्विलासं और अर्ली वर्निंग सिस्टम मजबूत करना- शुरआती चेतावनी प्रणालियों को बढ़ाने और संभावित प्रकोपों का शुरुआत में पता लगाने और समय रहते हस्तक्षेप की सुविधा के लिए मजबूत प्रहरी और निष्क्रिय निगरानी तंत्र बनाने पर जोर दिया जाएगा. 
  3. मानव संसाधन क्षमता का विकास- इसमें पशु स्वास्थ्य, मानव संसाधनों के कौशल और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण की पहल शामिल होगी. 
  4. डेटा सिस्टम, एनालिटिक्स, जोखिम विश्लेषण और जोखिम संचार को मजबूत करना- डेटा प्रबंधन प्रणालियों को उन्नत करना और एनालिटिक्स क्षमताओं को बढ़ाना, बेहतर जोखिम मूल्यांकन, बेहतर निर्णय लेने और पशु स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित अधिक प्रभावी संचार रणनीतियों को सक्षम बनाया जाएगा. 
  5. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थागत क्षमता के अंतर को कम करना- यह परियोजना पशुधन क्षेत्र के लिए आपदा प्रबंधन ढांचे के विकास, एएमआर खत्म करने की कोशि‍शों को बढ़ाने, साथ ही क्षेत्रीय प्लेटफार्मों के माध्यम से समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर संस्थागत क्षमता के अंतर को कम कर उसे मजबूत बनाया जाएगा. 

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