Cow Care: बाढ़-बरसात के दौरान गायों को जल्दी चपेट में ले लेती है ये 8 बीमारियां 

Cow Care: बाढ़-बरसात के दौरान गायों को जल्दी चपेट में ले लेती है ये 8 बीमारियां 

Cow Care सिर्फ गाय का दूध ही नहीं घी को भी बहुत अच्छा माना जाता है. भैंस के मुकाबले गाय के दूध को कहीं ज्यादा गुणकारी जाता है. रेट के मामले में भी बात करें तो देसी घी गाय का सबसे ज्यादा महंगा बिकता है. लेकिन बाढ़-बरसात के दौरान सबसे ज्यादा बीमारियां गायों को ही परेशान करती हैं. 

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Cow Care: बाढ़-बरसात के दौरान गायों को जल्दी चपेट में ले लेती है ये 8 बीमारियां योगी सरकार की 'मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना' का मिला लाभ

कुल दूध उत्पादन में भारत विश्व में पहले नंबर पर है. अगर गाय के दूध उत्पादन की बात करें तो उसमे भी भारत पहले नंबर पर है. गायों के दूध को दवाई की तरह से देखा जाता है. गाय के दूध से बने घी की भी बहुत डिमांड रहती है. हाल ही में आईडीएफ की ओर से वर्ल्ड डेयरी सिचुएशन 2024 रिपोर्ट  में भी बताया गया है कि कैसे भारत में लगातार गाय का दूध उत्पादन बढ़ रहा है. लेकिन एक बड़ी परेशानी ये भी है कि खासतौर से बरसात के दिनों में कुछ ऐसी बीमारियां हैं जो गायों को जल्दी चपेट में ले लेती हैं. 

क्योंकि गाय देसी नस्ल की हो या विदेशी, उन्हें बाढ़-बरसात के दौरान और बाद में सबसे ज्यादा बीमारियां परेशानी करती हैं. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बाढ़ और बरसात के दौरान अगर हम गायों पर लगातार नजर रखते हैं तो उन्हें छोटी-बड़ी इन 8 तरह की परेशानियों से बचाया जा सकता है और बीमारियों को कंट्रोल भी किया जा सकता है.

बाढ़-बरसात में होने वालीं गायों की बीमारी 

गलघोंटू बुखार 

सांस लेने में दिक्कत, गले में सूजन होती है. एंटीबायोटिक दवा और इंजेक्शन इलाज है. साथ ही बरसात के मौसम से पहले वैक्सीनेशन कराना चाहिए. 

थनैला    

थनों में दिक्कत, दूध में छर्रे आना, थनों में सूजन इस बीमारी के लक्षण है. अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं. पशु के दूध और थन की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए. 

लंगड़ा बुखार    

106-107 डिग्री तक बुखार होना, पशु के पैरों में सूजन, पशु का लंगड़ा कर चलना. बरसात से पहले वैक्सीनेशन करवाना और बीमार पशुओं को हेल्दी पशुओं से दूर रखना.

मिल्क फीवर    

शरीर का तापमान कम हो जाना, सांस लेने में परेशानी होना. प्रसव के 15 दिन तक पूरा दूध न निकालें और पशु को कैल्शियम से भरा आहार और सप्लीमेंट दें.

खुरपका मुहंपका    

मुंह और खुर में दाने होते हैं, दाने छाला बनकर फट जाते हैं और घाव गहरा हो जाता है. फौरन ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए    बरसात से पहले टीकाकरण कराना चाहिए और बारिश में पशु को खुले में चरने नहीं देना चाहिए.

प्लीहा (एंथ्रेक्स)    

पेशाब और गोबर में खून आना, तेज बुखार होना. पशु चिकित्सक से संपर्क कर स्थिति के हिसाब से उपचार करना चाहिए. इस रोग से बचाने के लिए वक्त रहते टीकाकरण करा लेना चाहिए.

यक्ष्मा (टीबी)    

पशु सुस्त हो जाता है, सूखी खांसी और नाक से खून आने लगता है. रोग के लक्षण दिखते ही पशु को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए. पशु के आहार का खास ध्यान रखना चाहिए.

संक्रामक गर्भपात    

पांच-छह महीने में योनिमुख से तरल गिरता है, बच्चे होने के लक्षण दिखते हैं, लेकिन गर्भपात हो जाता है. पशु की ठीक से सफाई करनी चाहिए, डीवॉर्मिंग करनी चाहिए और पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. छह से आठ महीने के पशु को ब्रुसेला का टीका लगवाना चाहिए. 

अफारा    

पशु का बायां पेट फूल जाता है, पेट को थपथपाने पर ढोलक की आवाज आती है. 

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