Animal Diet: बरसात में बीमार और चोटिल बहुत होते हैं पशु, ये होनी चाहिए खुराक Animal Diet: बरसात में बीमार और चोटिल बहुत होते हैं पशु, ये होनी चाहिए खुराक
Animal Diet जब भी गाय-भैंस बीमार हो जाएं या फिर उन्हें चोट लग जाए तो उन्हें भूखा न छोड़ें. क्योंकि बीमार और चोटिल होते ही पशुओं की खुराक न के बराबर रह जाती है. ऐसे में जरूरी है कि हम उन्हें कुछ ऐसा बनाकर दें जिससे उनके शरीर की जरूरत पूरी हो सके.
नासिर हुसैन - New Delhi,
- Aug 03, 2026,
- Updated Aug 03, 2026, 5:11 PM IST
बरसात के दौरान गाय-भैंस बीमार और चोटिल बहुत होते हैं. बरसात के दौरान ही सबसे ज्यादा मुंह पकने की परेशानी सामने आती हैं. खुजली के चलते पशु चोटिल भी बहुत होते हैं. और इस सब का सीधा असर पशुओं की खुराक पर पड़ता है. यहां तक की पशु जब बीमार हो जाता है तो तब भी पशु का खाना-पीना छूट जाता है. और इसके चलते पशुओं की सेहत गिरती चली जाती है. क्योंकि गाय-भैंस दूध दे रही हों या नहीं, या वो गर्भवती हो तभी उसे अच्छी खुराक की जरूरत होती है. बल्कि उत्पादन न करने वाले पशुओं को भी जीवन जीन के लिए अच्छे खानपान की जरूरत होती है.
इसलिए हर हाल में गाय-भैंस के लिए उसकी खुराक बहुत खास होती है. खासतौर पर ऐसे हालात में जब गाय-भैंस कुछ खाने को तैयार ना हो. ये हालात भैंस के बीमार होने या फिर उसके चोटिल होने पर हो सकते हैं. इसलिए एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो ऐसे वक्त में पशुओं को इस तरह की खुराक देनी चाहिए जिसे खाने में उसे बहुत ज्यादा मेहनत न करनी पड़े.
ऐसी होनी चाहिए खुराक
- चोटिल-बीमार पशु को रसीली घास देकर खाने के लिए ललचा सकते हैं.
- साबुत घास खाने में परेशानी हो तो घास काटकर भी खिलाई जा सकती है.
- कई बार मुंह में गहरी चोट है या मुंहपका के चलते पशु कुछ खा नहीं पाता है.
- ऐसे पशुओं को कई तरह के हरे चारे से मिलाकर बनाया गया सूप दे सकते हैं.
- पशु को ऐसा चारा दें जिसे जुगाली करने में ज्यादा मेहनत और वक्त ना लगता हो.
- पशु के सामने ऐसा चारा रखें जिसे वो बड़े ही शौक से खाता हो.
- भैंस को सिर्फ गुड़ या खाने में गुड़ मिलाकर खिलाया जा सकता है.
- बीमारी में भूख बढ़ाने के लिए हिमालयन बतीसा खिला सकते हैं.
- भैंस की खुराक में नमक मिलाकर भी उसे दिया जा सकता है.
- बीमार-चोटिल होने पर पशुओं की खुराक में एनर्जी-प्रोटीन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.
- सोयाबीन या मूंगफली की खल, वनस्पति तेल, गुड़, प्रोपलीन ग्लाइकोल, कैसिइन खिला सकते हैं.
- पशुओं को एक बार में ज्यादा खिलाने के बजाए थोड़ा-थोड़ा कई बार में दिया जा सकता है.
- अगर भैंस मुंह के रास्ते खाने-पीने में बेबस है तो उसे नली से घोल के रूप में दिया जा सकता है.
- माइक्रोबियल कल्चर प्रोबायोटिक्स (जैसे लैक्टोबैसिलस, यीस्ट) खिलाया जा सकता है.
- पानी की कमी को इलेक्ट्रोलाइट्स से और एसिडोसिस को बाइकार्बोनेट से ठीक किया जा सकता है.
- कभी भी बीमार-चोटिल पशु को खाने में दवाएं मिलाकर ना दें.
- खासतौर पर ऐसी दवाएं खाने में न मिलाएं जो स्वाद में कड़वी होती हैं.
- गर्भकाल के दौरान कड़वी दवाएं मुंह से खिलाने से बचना चाहिए.
- कड़वी दवा खाने से पशु बचता है और उठा पटक के चक्कर में तनाव में आ जाता है.
- कई बार इस तरह के तनाव के चलते भी भैंस का गर्भपात होने का खतरा बना रहता है.
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