भारतीय सीफूड को मिला नया बाजार, ओमान भेजी गई ताजी मछली की पहली खेप

भारतीय सीफूड को मिला नया बाजार, ओमान भेजी गई ताजी मछली की पहली खेप

CEPA लागू होने के साथ ही भारतीय समुद्री उत्पादों को ओमान के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है. इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि मछली पालन और सीफूड उद्योग से जुड़े किसानों, मछुआरों और कारोबारियों को भी बड़ा फायदा होगा.

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भारतीय सीफूड को मिला नया बाजार, ओमान भेजी गई ताजी मछली की पहली खेपभारतीय सीफूड को मिला नया बाजार

भारत के सीफूड निर्यात क्षेत्र के लिए 1 जून का दिन खास रहा. दरअसल, भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू होते ही चेन्नई एयरपोर्ट से ओमान के लिए पहली चिल्ड (ताजी) मछली की खेप रवाना की गई. यह खेप Aqua World Exports Pvt. Ltd. द्वारा भेजी गई, जिसे चेन्नई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दिखाई गई. इस कदम को भारत के सीफूड निर्यात के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

CEPA लागू होने के साथ ही भारतीय समुद्री उत्पादों को ओमान के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है. इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि मछली पालन और सीफूड उद्योग से जुड़े किसानों, मछुआरों और कारोबारियों को भी बड़ा फायदा होगा. यह खेप भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है.

झींगा मछली का आयात शुल्क हुआ जीरो 

भारत-ओमान समझौते के तहत झींगा, मछली और कटलफिश जैसे प्रमुख समुद्री उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क 5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है. इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे, जिससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. सरकार के अनुसार, इस समझौते में एक विशेष स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) ढांचा भी बनाया गया है, जिससे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की कस्टम क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज और आसान होगी. इसका सबसे बड़ा लाभ ताजा और उच्च क्वालिटी वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात को मिलेगा.

भारतीय मछुआरों और निर्यातकों को होगा फायदा

इसके अलावा, ओमान अब भारतीय सीफूड के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और पूर्वी अफ्रीका तक पहुंचने का महत्वपूर्ण व्यापारिक प्रवेश द्वार भी बन सकता है. इससे भारतीय सीफूड उद्योग, मछुआरों और निर्यातकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के दरवाजे खुलेंगे और उनके कारोबार को नई गति मिलेगी.

CEPA समझौते का तमिलनाडु को मिलेगा फायदा

भारत-ओमान CEPA समझौते का सबसे बड़ा फायदा तमिलनाडु को मिलने की उम्मीद है. लंबी समुद्री तट रेखा, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाहों और बेहतर प्रोसेसिंग सुविधाओं के कारण तमिलनाडु पहले से ही ओमान के साथ सीफूड व्यापार में मजबूत स्थिति में है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में तमिलनाडु ने ओमान को 2,279 टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 25 करोड़ रुपये थी. वहीं, 2025-26 के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु अब अधिक कीमत वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात पर जोर दे रहा है. इस दौरान 647 टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया, जिनकी कीमत लगभग 17.35 करोड़ रुपये रही.

भारत-ओमान CEPA से खुलेंगे नए बाजार

चेन्नई और अन्य बंदरगाहों की पश्चिम एशिया के देशों से नजदीकी होने के कारण ताजा, जीवित और फ्रोजन सीफूड की तेजी से आपूर्ति संभव हो पाती है. इससे उत्पादों की क्वालिटी बनी रहती है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिलती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से तमिलनाडु के सीफूड निर्यातकों को उत्पादन बढ़ाने, वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करने, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और ओमान और खाड़ी देशों के लिए नए उत्पाद विकसित करने का अवसर मिलेगा. इससे राज्य में निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सीफूड उद्योग को नई मजबूती मिलेगी.

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