Animal Mastitis: बरसात में ज्यादा होती है डेयरी को नुकसान पहुंचाने वाली थनेला बीमारी 

Animal Mastitis: बरसात में ज्यादा होती है डेयरी को नुकसान पहुंचाने वाली थनेला बीमारी 

Animal Mastitis डेयरी का अर्थशास्त्र पशु के दूध उत्पादन पर टिका होता है. और जैसे ही पशु दूध देना कम करता है या किसी बीमारी के चलते दूध दूषि‍त हो जाता है तो अर्थशास्त्र बिगाड़ जाता है. मुनाफा घटने के साथ लागत बढ़ जाती है. इसलिए दूध निकालते वक्त और एनिमल शेड में सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए. 

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Animal Mastitis: बरसात में ज्यादा होती है डेयरी को नुकसान पहुंचाने वाली थनेला बीमारी योगी सरकार की 'मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना' का मिला लाभ

अगर आप गाय-भैंस का दूध निकालते हैं और दूध निकालने से पहले और बाद में जरूरी तीन-चार काम नहीं करते हैं तो फिर आपका नुकसान होना तय है. क्योंकि डेयरी और पशुपालक को सबसे ज्यादा और बड़ा नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी पशुओं का दूध निकालने के दौरान ही होती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अगर दूध निकालने से पहले और उसके बाद साफ-सफाई नहीं बरती जाए तो पशुओं को खतरनाक थनैला बीमारी होना तय है. खासतौर से बरसात के दौरान दूध निकालने के तरीके में अगर जरा सी भी लापरवाही हुई तो पशु बीमार हो जाता है. 

यही वजह है कि पशुओं का निकाले जाने वाला दूध दूषि‍त न हो इसके लिए पशुपालकों को कई टिप्स दिए जाते हैं. केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), हिसार के साइंटिस्ट का कहना है कि बरसात में संक्रमण बहुत होता है. इसी के चलते थनैला बीमारी होने की संभावना ज्यादा रहती है. 

थनैला बीमारी होने की वजह 

  • थनैला बीमारी की सबसे बड़ी वजह खराब डेयरी मैनेजमेंट है.
  • कई बार मैनेजमेंट के दौरान पशुओं की देखभाल में लापरवाही जाती है.
  • लापरवाही के चलते दूध देने वाला पशु थनैला बीमारी का शि‍कार हो जाता है.
  • जैसे दूध निकालने से पहले थनों की सफाई ना करना. 
  • दूध निकालने वाले के कपड़े और हाथों के गंदा होने पर. 
  • दूध निकालने वाला अगर बीमार है. 
  • जिस बर्तन में दूध निकाला जा रहा उसका साफ ना होना. 
  • गंदी जगह पर बैठकर पशु का दूध निकालना. 
  • गाय-भैंस के बच्चे को दूध पिलाने के बाद थनों को ना धोना. 
  • पशु के पेट, थन और पूंछ पर चिपकी गंदगी से.

थनैला की रोकथाम ऐसे करें  

  • दूध दुहते समय पानी, बर्तन और फर्श की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट रहें. 
  • डेयरी में काम करने वाली लेबर के गंदा रहने और उनके गंदे कपड़े बीमारी को बढ़ा देते हैं. 
  • खराब खान-पान और तनाव पशुओं में थनैला से लड़ने की क्षमता को कमजोर करते हैं.
  • लुवास के वाइस चांसलर (वीसी) के मुताबिक थनैला बीमारी की पहचान दूध से की जा सकती है. 
  • दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की जांच से थनैला के बारे में वक्त रहते पता लग जाएगा. 
  • इसके लिए दूध के नमूने को स्फेक्ट्रो फोटो मीटर की मदद से जांचा जाता है. 
  • अगर पशु थनैला बीमारी से पीडि़त है तो दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाएगी. 

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