Calf Care in Monsoon: गाय-भैंस की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसे कम करनी होगी बछड़ों की मृत्यु दर 

Calf Care in Monsoon: गाय-भैंस की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसे कम करनी होगी बछड़ों की मृत्यु दर 

Calf Care in Monsoon बछड़ों की मृत्यु दर कम करने के लिए ही एनिमल साइंटिस्ट ने बछड़ों की देखभाल के लिए कुछ नियम बनाए हैं. अगर सभी तरीके से उन नियमों का पालन किया जाए तो फिर बछड़ों को बड़ी गाय-भैंस बनने से कोई नहीं रोक सकता है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अच्छी देखभाल होने पर बछड़ा कई तरह की छोटी-बड़ी बीमारियों से बचा रहता है. 

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Calf Care in Monsoon: गाय-भैंस की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसे कम करनी होगी बछड़ों की मृत्यु दर Birth of Sahiwal Breed Cows Calf Through IVF Technology

गाय-भैंस का एक बछड़ा जन्म लेने के बाद सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने में ही मदद नहीं करता है, गाय-भैंस का कुनबा भी बछड़ों से ही बढ़ता है. यही वजह है कि डेयरी और पशुपालन एक्सपर्ट बछड़े को एक बड़े मुनाफे का आधार बताते हैं. क्योंकि एक बछड़ा बड़े होकर दूध उत्पादन बढ़ाता है. और अगर सिर्फ एक साल तक भी पाल लिया तो फिर मीट के लिए बिक जाता है. लेकिन बछड़े से मुनाफा कमाना आसान नहीं होता है. किसी भी पशुपालक के लिए जन्म से लेकर बछड़े को 6 महीने की उम्र का करने में पसीने छूट जाते हैं. 

क्योंकि गाय-भैंस का छोटा बच्चा संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाता है. जिससे बछड़ों की मृत्यु दर बढ़ जाती है. इसीलिए जन्म से लेकर 6-8 महीने बछड़ों को बहुत देखभाल की जरूरत होती है. खासतौर पर बदलते मौसम में. बरसात के मौसम में ये देखभाल बहुत जरूरी बताई जाती है. अगर बदलते मौसम में पशु को किसी भी तरह का तनाव होता है तो मान लिजिए कि उसकी ग्रोथ पर इसका असर जरूर पड़ेगा. 

बछड़े पैदा हो तो करें ये काम 

  • नाक और मुंह साफ करें, जिससे बछड़े को बेहतर सांस लेने में मदद मिलती है.
  • शुरुआत में ऐसा करने से भविष्य में सांस लेने की परेशानियों को रोकने में मदद मिलती है.
  • मां के द्वारा बछड़े को चाटकर साफ करने दें, जिससे बछड़े के शरीर में रक्त संचार बढ़ता है और बछड़ा खड़े होकर चलने के लिए तैयार होता है.
  • नाभि की नाल को आधार से करीब दो इंच की दूरी पर धागे से बांधें और बची हुई नाल को साफ औजार से काटें.
  • नाभि को सात फीसद या उससे ज्यादा आयोडीन के घोल में डुबोएं (सिर्फ मलने से काम नहीं चलेगा) और 12 घंटे बाद फिर से दोहराएं. 
  • नाभि‍ धोने में टीट डिप या कमजोर आयोडीन घोल का इस्तेमाल न करें. खराब तरीके से किया गया नाभि का रखरखाव गंभीर संक्रमणों को न्योता देता है. 
  • नवजात बछड़े को जन्म के पहले दो घंटों के अंदर दो लीटर कोलोस्ट्रम और जन्म के 12 घंटे के बाद 1-2 लीटर (आकार के आधार पर) दिया जाना चाहिए.
  • कई बछड़े जन्म के कुछ घंटों तक अपनी मां से जरूरत के मुताबिक कोलोस्ट्रम नहीं पीते हैं.
  • जन्म के 24 घंटे बाद बछड़े को कोलोस्ट्रम खिलाना गलत है और ऐसा करने से बछड़े को संक्रमण से बचाने में मदद नहीं मिलती है.
  • बछड़े को उसके जीवन के पहले तीन महीनों तक बीमारियों से बचाने के लिए जरूरत के मुताबिक कोलोस्ट्रम मिलना चाहिए. 
  • नवजात बछड़ों को हाथ से कोलोस्ट्रम खिलाने की सलाह भी दी जाती है जिससे किसान को यह पता चल सके कि बछड़े को कितना कोलोस्ट्रम मिल रहा है.
  • 10-14 दिनों की उम्र के अंदर पेट के कीड़ों का इलाज किया जाना चाहिए और उसके बाद हर महीने छह महीने तक ऐसा किया जाना चाहिए.
  • बछड़ा तीन महीने का हो जाए तो टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
  • बेहतर विकास और जल्दी ग्रोथ के लिए दूसरे से लेकर आठवें  सप्ताह से से बछड़े को स्टार्टर दे सकते हैं.

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