सैलरी की टेंशन खत्म! 10 लाख के लोन से खड़ी की डेयरी, अब घर बैठे कमा रहे 75,000 रुपये महीने

सैलरी की टेंशन खत्म! 10 लाख के लोन से खड़ी की डेयरी, अब घर बैठे कमा रहे 75,000 रुपये महीने

मध्यप्रदेश की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ने सिवनी जिले के युवा रोबिन्स झारिया की जिंदगी बदल दी है. 10 लाख रुपये के बैंक ऋण और 33 प्रतिशत सब्सिडी की मदद से शुरू किए गए डेयरी व्यवसाय से वह आज हर महीने 60 से 75 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं.उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई है.

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सैलरी की टेंशन खत्म! 10 लाख के लोन से खड़ी की डेयरी, अब घर बैठे कमा रहे 75,000 रुपये महीने

मध्यप्रदेश सरकार की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है.इस योजना का लाभ लेकर सिवनी जिले के मझौली विकासखंड के रानीताल कटाव निवासी 25 वर्षीय रोबिन्स झारिया ने डेयरी व्यवसाय में सफलता की नई कहानी लिखी है.सरकारी सहायता, बैंक ऋण और सब्सिडी के सहारे शुरू किए गए उनके डेयरी कारोबार से आज उन्हें हर महीने 60 से 75 हजार रुपये तक की आय हो रही है.

10 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय

करीब एक वर्ष पहले रोबिन्स झारिया ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मझौली शाखा के माध्यम से योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया.इस राशि से उन्होंने 10 गिर नस्ल की गायें खरीदीं, आधुनिक डेयरी शेड का निर्माण कराया और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी यूनिट की स्थापना की.आज उनकी डेयरी इकाई व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही है और यह आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है.

हर दिन 50 से 60 लीटर दूध की बिक्री

रोबिन्स बताते हैं कि उनके साथ सुजीत झारिया, सौरभ कोष्टा और अनुज कोष्टा भी डेयरी संचालन में सहयोग करते हैं. प्रतिदिन 50 से 60 लीटर दूध की बिक्री होती है, जिससे उन्हें 2,000 से 2,500 रुपये की दैनिक आय प्राप्त होती है. इसी के आधार पर उनकी मासिक आमदनी 60 हजार से 75 हजार रुपये तक पहुंच गई है.

33 प्रतिशत सब्सिडी से मिली बड़ी राहत

योजना के तहत रोबिन्स को 33 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) का लाभ मिला.बैंक ऋण की लगभग 13 हजार रुपये मासिक किश्त जमा करनी होती है.डेयरी संचालन में होने वाले कुल खर्च का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पशुओं के चारे और देखभाल पर खर्च होता है.

हालांकि, उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि होने के कारण अधिकांश हरा चारा स्वयं के खेतों से उपलब्ध हो जाता है, जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है.

पशु चिकित्सालय से मिली योजना की जानकारी

रोबिन्स के अनुसार उन्हें इस योजना की जानकारी स्थानीय पशु चिकित्सालय से मिली थी.सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिलने के बाद उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुके हैं.

वे कहते हैं कि जिस सफलता की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, वह सरकार की इस योजना की बदौलत संभव हो सकी. इसके लिए उन्होंने मध्यप्रदेश शासन, पशुपालन विभाग और बैंक का आभार व्यक्त किया.

क्या है आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना?

मध्यप्रदेश सरकार की इस योजना का उद्देश्य राज्य में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाना तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है.

योजना के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • डेयरी यूनिट स्थापना के लिए 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण।
  • न्यूनतम 5 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने की पात्रता।
  • पात्र पशुपालको को 33 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 2 लाख रुपये)।
  • बैंक ऋण पर 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अनुदान (अधिकतम 25 हजार रुपये प्रति वर्ष), जो 7 वर्षों तक दिया जाता है।
  • योजना का लाभ लेने के लिए मध्यप्रदेश का निवासी होना तथा पशुपालन के लिए पर्याप्त कृषि भूमि होना आवश्यक है।

युवाओं के लिए बन रही प्रेरणा

रोबिन्स झारिया की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ लिया जाए, तो कम समय में डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाया जा सकता है. उनकी सफलता से क्षेत्र के अन्य युवा भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

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