मीट के लिए डोर्पर भेड़ भारत में पाली जा रही हैं.देश में सभी तरह के मीट की डिमांड बढ़ रही है. भेड़, बकरा और भैंस के मीट के साथ-साथ चिकन की डिमांड भी खूब बढ़ रही है. आज देश में सबसे ज्यादा चिकन खाया जा रहा है. बीते साल ही देश में चिकन का 50 लाख टन से ज्यादा का उत्पादन हुआ था. अब अगर बकरे और भेड़ के मीट की तुलना करें तो धीरे-धीरे ही सही, लेकिन भेड़ के मीट की डिमांड बढ़ रही है. जम्मू-कश्मीर समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में भेड़ों की खूब डिमांड हो रही है.
जम्मू-कश्मीर तो भेड़ के मीट की डिमांड का 50 फीसद हिस्सा दूसरे राज्यों से भेड़ लाकर पूरा कर रहा है. यही वजह है कि खासतौर पर मीट के लिए डॉर्पर भेड़ पाली जा रही हैं. शीप एक्सपर्ट की मानें तो अगर डॉर्पर भेड़ की खुराक का खास ख्याल रखा गया और एक्सपर्ट के मुताबिक खाने को दाना और चारा दिया गया तो भेड़ का वजन और मुनाफा दोनों साथ-साथ बढ़ेंगे.
डॉर्पर भेड़ों को सही तरीके से खिलाना उनके स्वास्थ्य और उत्पादकता को तय करता है. इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें खिलाने के लिए यहां तीन खास सुझाव दिए गए हैं.
अन्य भेड़ों की नस्लों की तरह डॉर्पर भेड़ें भी घास, फलियां और घास सहित अच्छी गुणवत्ता वाले चारे पर पनपती हैं. इसलिए तय कर लें कि डॉर्पर भेड़ों के लिए ताजा, साफ चारागाह हों जहां वे चर सकें. चारागाह पोषक तत्वों से भरपूर और दूषित पदार्थों से मुक्त होनी चाहिए. जब सर्दियों या सूखे के वक्त चारागाह की गुणवत्ता कम हो जाती है, तो उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके आहार में घास या साइलेज मिलाएं.
हालांकि डॉर्पर भेड़ें मज़बूत होती हैं और अकेले चारागाह पर जीवित रह सकती हैं. फिर भी उन्हें पूरक आहार की जरूरत होती है, खासकर तक जब वो बच्चों को दूध पिलाती हैं. गर्भावस्था के दौरान या जब वे भरपूर उत्पादन कर रही होती हैं. अनाज या तैयार किए गए पैलेट्स जैसे दाने, शरीर की स्थिति को बनाए रखने, ऊन का उत्पादन करने (हालांकि डॉर्पर भेड़ें बाल वाली भेड़ें हैं) और हेल्दी मेमनों को जन्म देने के लिए उन्हें ज्यादा अतिरिक्त ऊर्जा, प्रोटीन और खनिज की जरूरत होती है.
डॉर्पर भेड़ों की हैल्थ के लिए ताजा-साफ पानी की सप्लाई जरूरी है. पानी की कमी से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. खासकर गर्म मौसम के दौरान या बहुत ज्यादा मेहनत करने के बाद. इसके अलावा जरूरी विटामिन और खनिज जैसे नमक, कैल्शियम और फास्फोरस के साथ देने से उन कमियों को रोकने में मदद मिलती है जो उनके विकास, प्रजनन और हैल्थ को प्रभावित कर सकती हैं.
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