कई पेड़ों की हरी पत्तियां बकरियों के लिए दवाई की तरह से हैं. फोटो क्रेडिट-किसान तकछोटे पशु भेड़-बकरी ही नहीं गाय-भैंस के लिए भी चारे की कमी बहुत ज्यादा है. और परेशानी की बात ये है कि चारे की कमी दिन-बा-दिन बढ़ती ही जा रही है. यहां तक की अब तो ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि चारा लगाने के लिए जमीन ही कम पड़ने लगी है. भेड़-बकरी पालन करना मुश्किल हो गया है. बकरे-बकरियों को सस्ता और पौष्टि क चारा नहीं मिल पा रहा है. और अब ये परेशानी किसी खास दो-चार महीने की नहीं रही है, अब साल के 12 महीने हरा चारा मिलना मुश्किल हो जाता है.
एनीमल एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे की कमी को देखते हुए ही हे और साइलेज तैयार किए जाते हैं. लेकिन खासतौर पर बकरियां खुद डाल से तोड़कर हरा चारा खाना ज्यादा पसंद करती हैं. इसलिए बकरी पालन में फसल चक्र यानि चारा चक्र की बात कही जाती है. अगर फसल चक्र का पालन किया जाता है तो फिर बकरी पालन में हरे चारे की कमी नहीं आती है.
सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट का कहना है कि जमीन पर पड़े चारे के मुकाबले बकरी डाल से तोड़कर खाना पसंद करती है. इसमे बकरी को एक खास खुशी भी महसूस होती है. अगर मैदान में हरा चारा नहीं है तो हम नीम, गूलर, अरडू आदि पेड़ की पत्तियां खिला सकते हैं. अगर स्वाद और पसंद की बात करें तो बकरियां इन्हें खाना खूब पसंद करते हैं. सर्दियों में तो खासतौर पर नीम की पत्तियां खाना बहुत पसंद करती हैं.
पेड़ों से निकला हरा चारा उस वक्त और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब हरा फसली चारा मिलना मुश्किल होता है. और एक खास बात ये कि पेड़ों की पत्तियां बकरियों के सिर्फ पेट ही नहीं भरती हैं, बल्कि जड़ी-बूटी का काम भी करती हैं. जैसे नीम पेट को फायदा पहुंचाता है. दूसरा ये कि फसली हरे चारे में पानी की मात्रा बहुत होती है. इससे डायरिया होने का डर बना रहता है. जबकि पेड़ों में पानी कम होता है तो डायरिया की संभावना ना के बराबर रहती है.
सीआईआरजी की साइंटिस्ट का कहना है कि अमरुद, नीम और मोरिंगा में टेनिन कांटेंट और प्रोटीन की मात्रा बहुत होती है. अगर वक्त पर हम तीनों पेड़-पौधे की पत्तियां बकरियों को खिलाते हैं तो उनके पेट में कीड़े नहीं होंगे. पेट में कीड़े होना बकरे और बकरियों में बहुत ही परेशान करने वाली बीमारी है. पेट में अगर कीड़े होंगे तो उसके चलते बकरे और बकरियों की ग्रोथ नहीं हो पाएगी. पशुपालक जितना भी बकरे और बकरियों को खिलाएगा वो उनके शरीर को नहीं लगेगा. खासतौर पर जो लोग बकरियों को फार्म में पालते हैं और स्टाल फीड कराते हैं उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना होगा.
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