Green Fodder: पशुओं के चारे में मदद के बिना नहीं घटेगी दूध की लागत, जानें कैसे 

Green Fodder: पशुओं के चारे में मदद के बिना नहीं घटेगी दूध की लागत, जानें कैसे 

Green Fodder इस वक्त देश में हरे और सूखे चारे की कमी डिमांड की 25 फीसद से भी ज्यादा हो गई है. दूध उत्पादन के मामले में बेशक हमारा देश विश्व में नंबर वन है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में डेयरी प्रोडक्ट की पोजिशन ठीक नहीं है. इसके पीछे भी बड़ी वजह चारा ही बताया जा रहा है.  

Advertisement
Green Fodder: पशुओं के चारे में मदद के बिना नहीं घटेगी दूध की लागत, जानें कैसे पशुओं के लिए हरा और सस्ता चारा

पशुपालन में चारे की कमी और उसके बढ़ते रेट की परेशानी किसी एक मौसम की नहीं है. अब साल के 12 महीने ही किसी न किसी तरह से चारे की परेशानी रहती ही है. और अब तो ये परेशानी इतनी बड़ी हो चुकी है कि पशुपालन और डेयरी पर ही खतरा मंडराने लगा है. खासतौर से चार-पांच गाय-भैंस वाले पशुपालकों के लिए चारा बड़ी परेशानी बन चुका है. चारे की कमी और उसके महंगा होने के चलते ही दूध की लागत बढ़ रही है. चारे की परेशानी का असर डेयरी प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है.

एक्सपर्ट की मानें तो डेयरी में सभी तरह के चारे की कमी महसूस की जा रही है. चारा कमी की दर लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि डेयरी एक्सपर्ट लगातार सरकार को सुझाव दे रहे हैं कि चारे में मदद देकर सरकार डेयरी और पशुपालन सेक्टर की वक्त के साथ बड़ी हो रही परेशानी को खत्म कर सकती है. क्योंकि देश में अब चारे की जमीन भी कम होती जा रही है. 

ऐसे दूर होगी चारे की कमी 

  • रेडी-टू-ईट टोटल मिक्चर प्लान में निवेश करें.
  • चारा बीज प्रोसेसिंग और स्टो‍रेज के लिए सुविधाओं को बढ़ाया जाए. 
  • दूध उत्पादन दक्षता में सुधार के लिए सटीक फीडिंग विधियों पर काम हो. 
  • ज्यादा पोषण मूल्य वाली चारा फसलों के विकास और मीथेन उत्सर्जन को कम करने की जरूरत है.
  • ज्यादा चारा करने वाले क्षेत्रों से कम चारे वाले क्षेत्रों में चारे के लिए ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनाई जाए. 
  • फसल के अवशेष के ब्लॉक, गांठ, टीएमआर और छर्रों आदि के ट्रांसपोर्ट के लिए प्रोत्साहन दें.
  • क्वाउलिटी के फीड उत्पादन सुनिश्चित करने और दूषित पदार्थों को कंट्रोल करने के लिए नियम बनें.  
  • चारा प्लस एफपीओ का लाभ उठाया जाए और एक मॉडल की तरह पेश कर दूसरों को प्रोत्साहित करें.  
  • डेटाबेस मैनेजमेंट, सूचना एक्सचेंज करने के लिए राष्ट्रीय या क्षेत्रीय चारा ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाएं. 

ऐसे तैयार होगा सस्ता चारा 

फिरोज अहमद, चारा एक्सपर्ट और डॉयरेक्टर, कॉर्नेक्स्ट एग्री प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि डेयरी लागत को कैसे कम किया जाए. इसके लिए एक सबसे बड़ा काम ये किया जा सकता है कि डेयरी पशुओं की खुराक में पोषण को अहमियत दी जानी चाहिए. चारे की उत्पादकता बढ़ाई जाए. विपरीत हालात में भी पशुओं के लिए चारे की कमी ना हो और सप्लाई लगातार बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम बनाने पर काम करने की जरूरत है.

चारा उत्पादक किसान क्वालिटी का चारा उत्पादन कर सकें इसके लिए के चारा और चारा बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यस्तर पर योजनाएं बनानी होंगी. बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ानी होगी. इतना ही नहीं नॉन फारेस्ट बंजर जमीन, चरागाह और सामुदायिक जमीन का इस्तेमाल पशुओं के हरे चारे की खेती करने को बढ़ावा देना होगा.

ये भी पढ़ें- Breed Production: OPU-IVF से मां बनेंगी सड़क-खेतों में घूमने वाली छुट्टा गाय

ये भी पढ़ें- Egg Production: पोल्ट्री फार्म में कैसे बढ़ेगा अंडा उत्पादन, पढ़ें पोल्ट्री एक्सपर्ट के 10 टिप्स

POST A COMMENT