
पशुपालन में चारे के बाद अगर सबसे ज्यादा खर्च होता है तो वो पशुओं की बीमारियां हैं. लेकिन, एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बीमारियों पर होने वाले इस खर्च को कम कर पशुपालन की लागत भी घटाई जा सकती है. और जैसे ही पशुपालन की लागत घटेगी तो मुनाफा खुद-बा-खुद बढ़ जाएगा. लेकिन ये सब मुमकिन होगा बायो सिक्योरिटी से. जैसे ही पशुओं के फार्म पर डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक बायो सिक्योरिटी का पालन किया जाता है तो फार्म पर फैलने वाली बीमारियों में कमी आ जाती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि बायो सिक्योरिटी नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) का ही एक हिस्सा है. NOHM से सिर्फ पशुओं को ही नहीं हयूमन हैल्थ यानि इंसानों को भी जोड़ा गया है. क्योंकि जूनोटिक डिजीज से इंसान और पशु दोनों ही प्रभावित होते हैं. इसीलिए समय-समय पर आम जनता समेत पशुपालकों से भी अपील की जाती है. इसका मकसद पशु और इंसानों दोनों को ही हर छोटी-बड़ी बीमारी से बचाना है.
पशुपालन मंत्रालय से जुड़े जानकारों की मानें तो वन हैल्थ मिशन के तहत एनीमल फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी बहुत जरूरी है. कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद से तो इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की जाने लगी है.
एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो साइंटीफिक तरीके से किया गया पशुपालन पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी पशुओं की बीमारी से सुरक्षित रखता है. क्योंकि इंसानों में होने वाली करीब 70 फीसद बीमारियां पशुओं से होती हैं. इन्हें जूनोसिस या जूनोटिक भी कहा जाता है.
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