Animal Horn: गाय-भैंस, भेड़-बकरी के लिए फायदेमंद नहीं नुकसानदायक हैं सींग, जानें कैसे 

Animal Horn: गाय-भैंस, भेड़-बकरी के लिए फायदेमंद नहीं नुकसानदायक हैं सींग, जानें कैसे 

Animal Horn गाय-भैंस और भेड़-बकरियों के सींग को लेकर बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (BASU), पटना एक एडवाइजरी जारी कर चुका है. यूनिवर्सिटी की मानें तो अगर पशु के सींग ना हों तो वो सींग का कैंसर, सींग का खोल उतरना और सींग टूटने जैसी परेशानियों से बचा रहता है. साथ ही बिना सींग वाला पशु शेड में जगह भी कम लेता है. 

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Animal Horn: गाय-भैंस, भेड़-बकरी के लिए फायदेमंद नहीं नुकसानदायक हैं सींग, जानें कैसे बिजनौर में 6 गायों की संदिग्ध मौत. (Photo: Representational )

गाय-भैंस और भेड़-बकरियों के सिर पर सींग क्यों होते हैं. जिस किसी से भी ये सवाल किया जाएगा तो वो आमतौर पर यही जवाब देगा कि पशु सींग से अपनी रक्षा करते हैं. या कुछ लोग ये भी कह सकते हैं कि सींग की मदद से पशु अपने शरीर को खुजाते हैं. लेकिन ये कहना सही नहीं है. अगर ऐसा होता तो ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं के सींग बचपन में ही निकलने से पहले खत्म नहीं कराते. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो सींग के फायदे कम और नुकसान ज्यादा हैं. पशुपालन के दौरान इनके सींग का कोई खास महत्व नहीं है. 

अगर पशुपालन मैनेजमेंट की बात करें तो उसमे सींग ना होने को ही अच्छा माना जाता है. एक्सपर्ट सींग ना होने के बहुत सारे फायदे बताते हैं. फायदों की बात करें तो इसमें सबसे अहम बीमारियां हैं. सींग होने से बहुत सारी बीमारियों का खतरा बना रहता है. इसीलिए साइंटीफिक तरीके से पशुपालन करने वाले पशुपालक कई अलग-अलग तरीके अपनाकर बछड़ों के सींग निकलने से पहले ही खत्म कर देते हैं. 

ऐसे खत्म किए जाते हैं बछड़ों के सींग 

बासु के एक्सपर्ट बताते हैं कि बछड़ों का सींग रोधन करने के दो साइंटीफिक तरीके हैं. पहला कैमिकल और दूसरा है हीट प्रोसेस. लेकिन सींग खत्म करने की दोनों ही प्रक्रिया में बछड़ों के सींग वाले हिस्से को दवाई देकर सुन्न कर दिया जाता है. ऐसा करने से बछड़ों को दर्द नहीं होता है. साथ ही बछड़ों को ट्रेविस में बांधकर नियंत्रित भी किया जाता है. 

कैमिकल से ऐसे खत्म होते हैं सींग 

एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे पहले पशु को नियंत्रित करके सींग अंकुर के आस-पास के बालों को हटाया जाता है. सींग वाली जगह को साबुन से अच्छी तरह साफ किया जाता है. उसके बाद स्पिरिट या फिर बीटाडीन लोशन की मदद से उस जगह को किटाणु रहित करते हैं. सींग अंकुर के चारों तरफ वैसलिन का लेप लगाते हैं जिससे रसायन का फैलाव शरीर के दूसरे हिस्से में ना जाए. इसके बाद कास्टिक पोटाश को धीरे-धीरे उस वक्त तक रगड़ते हैं जब तक उस जगह थोड़ी मात्रा में ब्लड ना जाए. आखि‍र में उस जगह मक्खी भगाने वाला मलहम लगाया जाता है. 

हीट प्रोसेस से सींग खत्म करना 

हीट देकर सींग रोधन के लिए गरम लोहे या इलेक्ट्रीक रॉड का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से सींग के अंकुर को जला दिया जाता है. रासायनिक प्रक्रिया की तरह पशु को नियंत्रित करके सींग के अंकुर वाले हिस्से को आगे की प्रक्रिनया के लिए तैयार किया जाता है. गर्म लोहे की रॉड या इलेक्ट्रीक रॉड से सींग के अंकुर को ऊपर से जलाया जाता है. इस प्रक्रिाया के फौरन बाद ही उस जगह पर एंटी-सेप्टीक घोल या एंटी-सेप्टीक स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है.

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