कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सकेहर एक पशुपालक नए पशुओं की खरीद-फरोख्त करता है. पशुपालक छोटा है तो साल-दो साल में एक बार पशु खरीदता है. वहीं अगर किसी पशुपालक के पास पशुओं की संख्या ज्यादा है तो वो लगातार नए दुधारू पशु खरीदता ही रहता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो होता ये कि जब कोई पशु दूध देना बंद कर देता है या बहुत ही कम कर देता है तो उसकी जगह नया पशु लाया जाता है. लेकिन नया दुधारू पशु खरीदना कोई आसान काम नहीं है. दूध उत्पादन देखने के साथ ही ये भी परखना होता है कि आने वाला नया पशु हेल्दी भी हो.
उसे किसी तरह की कोई बड़ी बीमारी न हो. अगर पशु पहचानने में जरा सी चूक हुई नहीं की हजारों रुपये की चपत लग जाती है. वर्ना नए दुधारू पशु को खरीदकर घर लाने के बाद उसे कितनी भी खुराक खिलाते रहो उसका दूध उत्पादन नहीं बढ़ता है. इसी तरह से अगर बाड़े में गाभिन पशु है तो उसे भी खास खुराक की जरूरत होती है. सभी तरह का चारा उसकी खुराक में शामिल होना बहुत जरूरी होता है.
एनिमल एक्सपर्ट पशुपालकों को सलाह देते हैं कि गाभिन गाय हो या भैंस उसके लिए हर रोज हरा चारा 25 से 30 किलो, सूखा चारा चार से पांच किलो, खल एक किलो, नमक 30 ग्राम, मिनरल मिक्चर 50 ग्राम, संतुलित पशु आहार दो से तीन किलो खिलाना बहुत जरूरी है. वहीं पीने के लिए 75 से 80 लीटर पीने का साफ पानी भी होना चाहिए.
नेपियर घास, ज्वार, मक्का, बरसीम आदि उगाया जा सकता है.
इसमे गेहूं-धान का भूसा, सूखी घास शामिल है जो लम्बे वक्त तक चलती है और सुराक्षित भी रहती है.
ये एक पौष्टि क मिश्रण है, इसमे अनाज, खली, नमकर, मिनरल आदि मिलाए जाते हैं.
इसमे हरे चारे को एक खास तकनीक अपनाकर टैंक, पोलीबैग में रखकर तैयार किया जाता है और ये लम्बे वक्त तक चलता है.
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