सीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तकआपको पढ़कर शायद ताज्जुब हो, लेकिन ये सच है कि लाखों की संख्या में बकरे भी ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच हो रही लड़ाई की चपेट में आ गए हैं. इन बकरों के भी विदेश जाने पर तलवार लटकी हुई है. हालांकि 26 मई के आसपास बकरीद है. लेकिन फिर भी ऐसे कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं कि बकरे खाड़ी देशों को जा सकें. जिसका बड़ा असर बकरों के घरेलू बाजार पर भी पड़ेगा. जानकारों की मानें तो हर साल लाखों की संख्या में बकरे भारत से पानी के रास्ते खाड़ी देशों को जाते हैं.
बकरीद के मौके पर होने वाली कुर्बानी के लिए खाड़ी देशों में बकरे और भेड़ की डिमांड रहती है. खासतौर पर भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भेड़ और बकरे खाड़ी देशों को सप्लाई किए जाते हैं. सऊदी अरब में खासतौर पर हज के दौरान कुर्बानी के लिए बकरों की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है.
एक आंकड़े के मुताबिक इस साल करीब 18 लाख मुसलमान मक्का-मदीना (सऊदी अरब) में हज यात्रा पूरी करेंगे. हज के दौरान हर एक यात्री को बकरीद के मौके पर एक बकरे की कुर्बानी दी जाती है. बकरों की कुर्बानी का ये सिलसिला तीन दिन तक चलता है. ऐसे में अकेले 18 लाख बकरे तो सिर्फ हज यात्रियों के लिए ही चाहिए होते हैं. जानकार बताते हैं कि हज यात्रियों के लिए बकरों की सप्लाई एशिया के तीन देशों भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से की जाती है.
महाराष्ट्र के बकरा कारोबारी हाजी सलीम ने किसान तक को बताया कि बकरीद से कुछ दिन पहले बकरों को खाड़ी देश भेजने का सिलसिला शुरू हो जाता है. और इस बार अभी ये शुरू नहीं हुआ है. ईरान और अमेरिका के बीच जो ताजा हालात हैं तो उन्हें देखकर नहीं लग रहा है कि बकरीद से पहले बकरे विदेश जा भी पाएंगे. और इसका सबसे ज्यादा नुकसान घरेलू बाजार के कारोबारियों को उठाना पड़ेगा. जो पूरे साल बकरे पालते हैं और बकरीद पर कुछ मुनाफा कमाते हैं तो ऐसे लोगों को नुकसान हो सकता है.
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