Rinderpest Disease: भारत से रफ्तार पकड़ेगा एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट, इस ग्रुप में हो रहा बड़ा काम 

Rinderpest Disease: भारत से रफ्तार पकड़ेगा एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट, इस ग्रुप में हो रहा बड़ा काम 

Rinderpest Disease भारत दूध उत्पादन में नंबर वन, अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है. वहीं मीट उत्पादन की बात करें तो 5वें स्थान पर है. लेकिन अच्छी खबर ये है कि जल्द ही भारत से एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ सकता है. क्योंकि भारत को एनिमल डीजीज कंट्रोल के चलते एक ग्लोबल एलीट ग्रुप में शामिल किया गया है. 

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Rinderpest Disease: भारत से रफ्तार पकड़ेगा एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट, इस ग्रुप में हो रहा बड़ा काम एनिमल हसबेंडरी मंत्रालय की रिपोर्ट.

दूध-मीट हो या फिर अंडा, सभी के उत्पादन के मामले में भारत से पहले-दूसरे से लेकर पांचवें नंबर पर है. नंबरों का ये आंकड़ा जल्द ही और अच्छा हो सकता है. अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिनों में भारत से एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ जाएगा. एक्सपोर्ट के आंकड़े को बढ़ाने के लिए ग्लोबल लेवल पर एक बड़े ग्रुप में तेजी से काम चल रहा है. करीब एक साल पहले ही भारत को इस एलीट ग्रुप में शामिल किया गया है. 

भारत को इस ग्रुप में एनिमल डीजीज कंट्रोल और बायोसिक्योरिटी में किए गए बड़े काम को देखते हुए शामिल किया गया है. इतना ही नहीं ICAR -राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा कैटेगिरी A रिंडरपेस्ट होल्डिंग सुविधा (आरएचएफ) के रूप में मान्यता दी गई. रिंडरपेस्ट होल्डिंग मवेशि‍यों के प्लेग से जुड़ा है. 

विश्व की सबसे खतरनाक बीमारी है मवेशी प्लेग 

रिंडरपेस्ट को मवेशी प्लेग भी कहा जाता है. मवेशी प्लेग इतिहास में पशुधन की सबसे खतरनाक बीमारी के रूप में दर्ज है. लेकिन साल 2011 से वर्ल्ड लेवल पर इसे खत्म करने के लिए एक ग्रुप बनाने के साथ एक अभि‍यान शुरू किया गया था. हालांकि कुछ जानकारी के मुताबिक रिंडरपेस्ट वायरस-युक्त सामग्री (RVCM) अभी भी कुछ प्रयोगशालाओं में बनी हुई है, जो जारी होने पर संभावित जोखिम पैदा करती है.

यही वजह है कि रिंडरपेस्ट बीमारी से दुनिया को मुक्त बनाए रखने के लिए, FAO और WOAH ने RVCM के स्टोरेज को दुनिया भर में कुछ उच्च सुरक्षा प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं. इसी के चलते ही भारत ने 2012 में एवियन इन्फ्लूएंजा के लिए एक उच्च-नियंत्रण बीएसएल-3 सुविधा और WOAH संदर्भ प्रयोगशाला ICAR-NIHSAD को RVCM के लिए अपने राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित किया था.

FAO और WOAH द्वारा नियुक्त इंटरनेशनल एक्सपर्ट द्वारा मार्च 2025 में ICAR-NIHSAD का संयुक्त निरीक्षण किया गया था. सख्त मूल्यांकन के बाद संस्थान को अब अपने मजबूत जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल, प्रभावी सूची प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों के लिए तत्परता की स्थिति को मान्यता देते हुए एक साल की अवधि के लिए कैटेगिरी A RHF के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता मिली है.

यह मान्यता भारत को दुनिया भर में केवल छह सुविधाओं के एक प्रतिष्ठित समूह में रखती है जिन्हें रिंडरपेस्ट वायरस सामग्री को सुरक्षित रूप से रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. भारत की ये कामयाबी वैश्विक पशु स्वास्थ्य, जैव सुरक्षा और वन हेल्थ फ्रेमवर्क में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को पुख्ता करती है. 

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