14 मई को आगरा में होगा दुग्ध समागमदूध के दामों को लेकर एक बार फिर से बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बाजार में एक बार फिर दूध के दाम बढ़ सकते हैं. हालांकि डेयरी कंपनियों ने पिछले महीने ही दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ाए थे. लेकिन अमूल के पूर्व एमडी और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी की मानें तो एक बार फिर दूध के दाम बढ़ सकते हैं. और दाम बढ़ने के पीछे दो ठोस वजह हैं. जिसके चलते दूध की लागत बढ़ चुकी है.
इसलिए बढ़ी हुई लागत के साथ पशुपालकों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता है. अगर ये बात सच होती है तो दूध और चाय पीने वालों को एक और जोर का झटका धीरे से लग सकता है. हालांकि दाम बढ़ाने के पीछे डेयरी कंपनियों की भी मजबूरी बताई जा रही है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो अभी कंपनियां और पशुपालक खुद बढ़ी हुई लागत का बोझ उठा रहे हैं.
किसान तक के एक लाइव शो में बात करते हुए डॉ. आरएस सोढ़ी ने चेताया कि गर्मी के इस मौसम में अल नीनो का असर देखने को मिलेगा. ये हमारी खेती और पशुपालन पर भी असर डालेगा. जिसके चलते दूध और चारे का उत्पादन कम होगा. कम उत्पादन के चलते चारा फसल महंगी भी हो जाएगी. वहीं दूसरी ओर ईरान-अमेरिका और इजरायल विवाद के चलते देश में तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. डीजल महंगा होने की वजह से दूध उत्पादन और वितरण की लागत बढ़ गई है. इसलिए दूध के दाम दोबारा से बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है.
एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने किसान तक से बातचीत में बताया कि पेट्रोल-डीजल के जो दाम बढ़ रहे हैं उसका असर डेयरियों पर भी पड़ रहा है. मिल्क सप्लाई चेन में ट्रांसपोर्ट का बड़ा और अहम रोल है. पशुपालक के घर से शुरू होने वाला सिलसिला डेयरी प्लांट तक ट्रांसपोर्ट पर ही टिका होता है. पेट्रोल-डीजल के दाम पर हुई बढ़ोतरी का असर दूध और दूध से बनने वाले प्रोडक्ट पर दिखना शुरू हो गया है. लागत बढ़ गई है. लेकिन अभी बढ़ी हुई लागत का बोझ कंपनियां ही उठा रही हैं. लेकिन बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाने की कंपनियों की भी अपनी एक क्षमता है.
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