क्या है इस नस्ल के भैंस की खासियतसुनने में बेशक ये बात कुछ अजीब लगे, लेकिन एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि भैंस के शेड और उसकी खाने की नांद के डिजाइन का असर उसके खानपान पर पड़ता है. इसलिए अगर शेड और नांद बनवाते वक्त मानकों का ख्याल नहीं रखा तो अच्छी से अच्छी खुराक देने पर भी भैंस का उत्पादन नहीं बढ़ेगा. इसलिए शेड बनवाते वक्त सबसे पहले भैंस को विपरीत मौसम से बचाने वाले शेड का निर्माण कराया जाना चाहिए. दूसरा वो ऐसा होना चाहिए जहां भैंस आराम से दूध दोहने दे.
तीसरा शेड के अंदर घूमने-फिरने में भैंस को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. और सबसे खास ये कि उसकी खाने की नांद का डिजाइन इस तरह से रखा गया हो कि उसे खाने के लिए ना तो बहुत नीचे गर्दन झुकानी पड़े और ना ही ज्यादा सीधे खड़े होकर खाने की कोशिश करनी पड़े.
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भैंस का शेड तीन तरफ से पांच फीट ऊंची दीवार से घिरा होना चाहिए.
शेड में जहां नांद बनाई जाए वहां दीवार नहीं होनी चाहिए.
ख्याल रहे कि नांद हमेशा उत्तर दिशा में बनानी चाहिए.
नांद का डिजाइन ऐसा होना चाहिए जिसमे आसानी से चारा डाला जा सके.
जवान भैंस के लिए नांद की जमीन से ऊंचाई 50 सेमी और बछड़ों के लिए 20-25 सेमी होनी चाहिए.
भैंस और बछड़ों के लिए नांद की गहराई 40 और 20 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
शेड के अंदर बने नांद के पास पांच फीट चौड़ा, बिना फिसलन वाला, आसानी से साफ होने वाला और थोड़ा ढलान वाला फर्श बनवाया जाना चाहिए.
शेड के कवर्ड एरिया का फर्श शेड की खुली जमीन से थोड़ा ऊपर होना चाहिए.
शेड के ओपन एरिया में पीने के पानी के लिए एक टंकी बनाई जानी चाहिए.
शेड की नालियां ढकी हुई होनी चाहिए.
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शेड में एक भैंस के लिए कवर्ड एरिया 30-40 और ओपन एरिया 800-1000 वर्ग फुट होना चाहिए.
शेड में बछड़ों के लिए कवर्ड एरिया 20-25 और ओपन एरिया 50-60 वर्ग फुट होना चाहिए.
चारे के लिए भैंस की नांद की जगह के पास कवर्ड एरिया में ढाई से तीन फीट की जगह होनी चाहिए.
चारे के लिए नांद की जगह के पास बछड़े के लिए कवर्ड एरिया में डेढ़ फीट की जगह होनी चाहिए.
शेड की छत पाइप और एंगल आयरन पर एस्बेस्टस शीट के साथ थोड़ी ढलान वाली बनानी चाहिए.
लागत कम करने के लिए एस्बेस्टस और टिन की चादरों की तुलना में छप्पर की छत भी बनाई जा सकती है.
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