Milk Production: गर्मियों में नहीं घटेगा दूध उत्पादन, बबेसियोसिस से बचाने को करें ये उपाय 

Milk Production: गर्मियों में नहीं घटेगा दूध उत्पादन, बबेसियोसिस से बचाने को करें ये उपाय 

Milk Production पैरासाइट पशुओं के खून में चिचड़ियों के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं. खून में जाकर रेड ब्लड सेल में अपनी संख्या बढ़ाने लगते है. जिसके चलते शरीर का हीमोग्लोबिन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है. इस दौरान पेशाब लाल या गहरे भूरे रंग का हो जाता है. 

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Milk Production: गर्मियों में नहीं घटेगा दूध उत्पादन, बबेसियोसिस से बचाने को करें ये उपाय भैंस की टॉप 4 नस्लें

गर्मियां शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी परेशानी ये होती है कि गाय-भैंस का दूध उत्पादन कम हो जाता है. गर्मियों के दौरान दूध उत्पादन घटने की कई वजह हो सकती हैं. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक इसमे से एक बड़ी वजह बबेसियोसिस भी है. ये एक ऐसी बीमारी है जो खासतौर पर गाय-भैंस को गर्मी और सर्दियों के मौसम में होती है. गर्मियों में होने की वजह ये है कि जिस पैरासाइट की वजह से ये बीमारी होती है तो वो तेज गर्मी में जल्दी पनपते हैं. 

ये पैरासाइट गाय-भैंस का खून चूसते हैं. इसके चलते पशु तनाव (स्ट्रेस) में आ जाता है और उसका उत्पादन घट जाता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गाय-भैंस में होने वाली किलनियों और चीचड़ों की रोकथाम करें. क्योंकि बबेसियोसिस बीमारी की वजह भी यही दोनों हैं. बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामिल हैं. 

गाय-भैंस में बबेसियोसिस के लक्षण

गाय-भैंसों को बीमारियों से बचाना है तो उनकी उचित देखभाल बहुत जरूरी है. फिर चाहें मौसम कोई भी हो. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो हर मौसम में कोई न कोई एक-दो बीमारियां ऐसी हैं जो दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित होती हैं. ऐसी ही एक बीमारी है बबेसियोसिस. अगर वक्त रहते इस बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना गया, वक्त से पशु का इलाज शुरू नहीं हुआ तो कई बार पशु की मौत तक हो जाती है.

  • बबेसियोसिस के चलते पशु खाना-पीना छोड देता है. 
  • बबेसियोसिस की वजह से ही दूध उत्पादन घट जाता है. 
  • बबेसियोसिस से पीडि़त पशु को तेज बुखार आ जाता है.
  • खून की कमी, हदय की धड़कन बढ़ना और पीलिया हो जाता है. 
  • पीडि़त पशु लाल या फिर ब्रॉउन कलर का पेशाब करता है. 
  • बबेसियोसिस पीडि़त पशु को खूनी दस्त की शि‍कायत हो जाती है. 
  • बीमारी बढ़ने पर वक्त से इलाज नहीं मिले तो 90 फीसद केस में पशु की मौत हो जाती है. 

बबेसियोसिस पीडि़त का ऐसे करें इलाज

बबेसियोसिस संक्रमित पशु के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कराएं.
अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार को रोकने के बारे में जागरुकता फैलाएं.
जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखें तो उनके खून की जांच कराएं. 
पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्‌यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए.

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