ऊंटनी के दूध विश्व के बहुत सारे देशों में ऊंट पाले जाते हैं. भारत में भी ऊंट पालन होता है और इसे रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है. लेकिन अफसोस की बात ये है कि दूसरे देशों में तो नहीं, लेकिन भारत में ऊंटों की संख्या घटने लगी है. राजस्थान में ही ऊंटों की संख्या लगातार घट रही है. इसे लेकर भारत सरकार ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की संस्था खाद्य और कृषि संगठन (FAO) भी परेशान है. अभी बीते साल ही यूएनओ ने साल को अंतर्राष्ट्रीय कैमेलिड वर्ष घोषित किया था. भारत में भी बहुत सारे कार्यक्रम घोषित किए गए थे.
राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NCRC) ने कार्यक्रमों का आयोजन किया था. FAO के भारत में प्रतिनिधि ताकायुकी हागिवारा कार्यक्रमों में अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. इस मौके पर ऊंटों की संख्या बढ़ाने और उन्हें उपयोगी बनाने के लिए ऊंटनी के दूध को फ्यूचर मिल्क की लिस्ट में शामिल करने की घोषणा की गई थी. लिस्ट में शामिल पशुओं की घटती संख्या को रोकने और उसे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार भी बड़े पैमाने पर काम कर रही है.
भारत का लक्ष्य ऊंटों का संरक्षण करना और ऊंटनी के दूध उद्योग की संभावित क्षमताओ को सामने लाना है. यूएनओ के अंतर्राष्ट्रीय कैमेलिड वर्ष को इसी विषय के साथ मनाया गया है. खासतौर से ऊंटनी दूध उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और मूल्य-श्रृंखला में सभी हितधारकों को शामिल करके ऊंट पालकों के विकास के लिए स्थायी समाधान का पता लगाने पर भी चर्चा की जा रही है.
फोडर एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में ऊंटों की आबादी घट रही है. ऊंटों की आबादी में और गिरावट को रोकने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. इतना ही नहीं स्थायी चरागाह के लिए जमीन भी तय करनी होगी. हालांकि ऊंट पालने वाले समुदाय की मदद करने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन काम कर रहा है. ऊंटनी का दूध एक नहीं कई मायनों में बहुत जरूरी और ताकतवर है. इसलिए इसके संरक्षण की बहुत जरूरत है. इससे मुनाफा भी बहुत होगा. साथ ही ऊंट किसानों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत है, जिससे उनकी चुनौतियों को समझा जा सके.
कैमिल एक्सपर्ट का कहना है कि देश में ऊंटों की आबादी में गिरावट आ रही है. इसलिए सबसे पहले ये जरूरी है कि आबादी घटने की वजहों पर एक छोटा अध्ययन किया जाए कि ऐसा क्या हो रहा है. ये जरूरी भी है. साथ ही ऊंटनी के दूध के महत्व को किसी और विषय से जोड़ने के बजाए मेडिशनल वैल्यू से जोड़कर बात की जाए. दूसरा ये कि ऊंटों की आबादी को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हम न्यूक्लियस ब्रीडिंग फार्म और ब्रीडर्स सोसाइटी को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दें.
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