
अभी बीते तीन-चार दिन से मौसम में उतार-चढ़ाव चल रहा है. जिसके चलते तापमान सामान्य बना हुआ है. लेकिन गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. आने वाले 8-10 दिन में गर्मी और बढ़ जाएगी. तापमान भी बढ़ने लगेगा. गर्म हवाएं चलने लगेंगी. अगर एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस तरह के मौसम में किसी भी छोटे-बड़े पशु को खाने को बेशक कम मिले, लेकिन पीने के लिए ताजा-स्वच्छ पानी बहुत जरूरी है. पानी की कमी किसी के भी शरीर में कई तरह की बीमारियां पैदा करती है. पानी की कमी के चलते पशुओं को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है.
पशुओं के शरीर में होने वाली पानी की कमी को कैसे पहचान सकते हैं, इस बारे में वेटरनरी यूनिवर्सिटी राजूवास, बीकानेर हर साल एडवाइजरी जारी करता है. एक्सपर्ट का तो ये भी कहना है कि अगर गर्मियों के दौरान पशुओं की खुराक में हरे चारे की मात्रा भरपूर रखी जाए तो एक किलो हरे चारे से तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है. इसलिए एक्सपरर्ट की सलाह मानकर पशुओं के पीने के पानी का सिस्टम जरूर बनाएं.
जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.
पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्व मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.
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