Goat Registration: बुंदेलखंडी बकरी को मिला टैग, पीछे छूटी सोनपरी, 41 हो गईं बकरियों की नस्ल 

Goat Registration: बुंदेलखंडी बकरी को मिला टैग, पीछे छूटी सोनपरी, 41 हो गईं बकरियों की नस्ल 

एनबीएजीआर, करनाल ने बुंदेलखंडी बकरी को रजिस्टर्ड किया है. भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (IGFRI), झांसी में साइंटिस्ट डॉ. बीपी कुशवाहा, डॉ. दीपक उपाध्याय, डॉ. एसके महंत, डॉ. केके सिंह और डॉ. अमरेश चंद्र की टीम ने इस नस्ल को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिचया तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया है. 

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Goat Registration: बुंदेलखंडी बकरी को मिला टैग, पीछे छूटी सोनपरी, 41 हो गईं बकरियों की नस्ल किसानों के लिए ATM है ये बकरी की नस्ल

बकरी पालन क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी आई है. देश में बकरियों की दो और नस्ल को टैग मिल गया है. बीते साल ही तीन बकरियों को रजिस्ट्रेशन टैग मिला था. दो नई और नस्ल आने से बकरियों का कुनबा और बड़ा हो गया है. बड़ी बात ये है कि यूपी और मध्य प्रदेश की बुंदेलखंडी बकरी को भी रजिस्टर्ड कर लिया गया है. इसके अलावा उत्तराखंड की चौगरखा बकरी को भी रजिस्टर्ड किया गया है. बकरियों की दो नस्ल रजिस्टर्ड होने के बाद अब बकरियों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 41 हो गई है.

हालांकि इस मामले में बकरियों की एक खास नस्ल सोनपरी पीछे छूट गई है. बीते साल भी सोनपरी की फाइल फाइनल तक नहीं जा पाई थी. सोनपरी मूल रूप से सोनभद्र की नस्ल है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा भी इस खास नस्ल पर काम कर रहा है. इस नस्ल को खासतौर पर मीट के लिए पाला जाता है. 

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जानें यूपी-एमपी में कहां पाली जाती है बुंदेलखंडी बकरी 

भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (IGFRI), झांसी लम्बे वक्त से बुंदेलखंडी बकरी की नस्ल पर रिसर्च कर रहा था. इस बकरी की कई सारी खूबियों के चलते इसे रजिस्टर्ड कराने की प्रक्रि या भी चल रही थी. बकरियों में ये बुंदेलखंड की एक पुरानी नस्ल है. यूपी के साथ ही ये मध्य प्रदेश के भी कई इलाकों में पाली जाती है. जैसे यूपी में झांसी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर और जालौन में इसे खूब पाला जाता है. वहीं मध्य प्रदेश के 6 जिले सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ छतरपुर और दतिया में भी बुंदेलखंडी नस्ल पाली जाती है.   

ये है बुंदेलखंडी बकरी की पहचान और खासियत

बुंदेलखंडी बकरी की खासियत ये है कि ये कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से रह लेती है. यह बकरी लंबी दूरी तक चल सकती है इसलिए चराई के लिए बहुत उपयुक्त है. बुंदेलखंडी जुड़वां या कभी-कभी तीनों बच्चे तक देती है. इसे खास तौर पर मीट के लिए पाला जाता है. इसकी पहचान ये है कि बुंदेलखंडी बकरी के शरीर पर लंबे बाल होते हैं. इसकी आंखों और थूथन का रंग काला होता है. इसके कान लटकते हैं और पूंछ मुड़ी होती है. 

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