Azola Production: जानें कैसे उगाएं और खिलाएं अजोला चारा, उत्पादन भी बढ़ेगा और सेहत भी सुधरेगी Azola Production: जानें कैसे उगाएं और खिलाएं अजोला चारा, उत्पादन भी बढ़ेगा और सेहत भी सुधरेगी
Azola Production आने वाले वक्त में अजोला की खेती बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. क्योंकि कम होती जमीन के चलते लाइव स्टॉक सेक्टर में हरे और सूखे चारे की लगातार कमी हो रही है. चारा बाजार में महंगा भी होता जा रहा है. जबकि अजोला उत्पादन का तरीका अलग है. इसके लिए कोई बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं है.
घर की छत पर चारा उगाएंनासिर हुसैन - New Delhi,
- Jan 09, 2026,
- Updated Jan 09, 2026, 4:24 PM IST
Azola Production इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट और अमूल के पूर्व एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी की मानें तो बाजार में एनिमल प्रोडक्ट जैसे, दूध, घी, अंडा-चिकन, मीट आदि की डिमांड बढ़ रही है. आने वाले सात साल पोल्ट्री, डेयरी, फिशरीज और पशुपालन जैसी फूड इंडस्ट्री के हैं. इसके चलते जहां नौकरियों मौके मिलेंगे तो कारोबार करने का मौका भी मिलेंगा. वहीं एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि देश की चारा इंडस्ट्री भी इसी से जुड़ी हुई है. अगर देश में एनिमल प्रोडक्ट के लिए पशुओं की संख्या बढ़ेगी तो उनके लिए फीड और फोडर की डिमांड भी बढ़ेगी. और इस सब के बीच हरा चारा अजोला का बाजार भी बढ़ेगा. पशुओं के लिए बाजार में गुणवत्ता वाले चारे की जरूरत है.
इसलिए ये जान लेना बहुत जरूरी है कि अजोला चारा का उत्पादन कैसे किया जाता है और इसे खिलाने का तरीका क्या है. सरकारी रिपोर्ट पर जाएं तो दूध-मीट की बढ़ती डिमांड के बीच चारागाहों का क्षेत्रफल घटता जा रहा है. ऐसी फसल के उत्पादन में भी कमी आ रही है जिनका इस्तेमाल पशु आहार के रूप में होता है. इसी के चलते अब ज्यादा उपज और छोटी नस्ल वाली फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है. हरा चारा अजोला उसी में से एक है.
ऐसे होता है अजोला का उत्पादन
- अजोला उत्पादन के लिए सबसे पहले करीब 10 से 15 किलोग्राम छनी हुई उपजाऊ मिट्टी गड्ढे में सिलपोलिन शीट पर फैला दें. दो किलो गोबर और 30 ग्राम सुपर फॉस्फेट 10 लीटर पानी में घोल बनाकर गड्ढे में डाल दें. इसमें पानी डालकर, पानी का लेवल 10 सेंमी तक कर दें. और 500 ग्राम से एक किलोग्राम तक अजोला कल्चर गड्ढे के पानी में डाल दें.
- अजोला चारा बहुत तेजी से विकसित होता है और 10 से 15 दिन के अंदर पूरे गड्ढे में फैल जाता है. इसके बाद 400-600 ग्राम अजोला हर रोज गड्ढ़े से बाहर निकाला जा सकता है.
- प्रत्येक पांच दिन में एक बार 20 ग्राम सुपर फॉस्फेट और करीब एक किलो गोबर गड्ढे में डालने से अजोला तेजी से विकसित होता है.
- ऊपर बताए तरीके अपनाने से आप औसत हर रोज 500 ग्राम अजोला प्रति गड्ढा उत्पादन लिया जा सकता है.
- अजोला में खनिज की मात्रा को और बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि मैग्नीशियम, लोहा, तांबा, सल्फर आदि को मिलाकर समय-समय पर उचित मात्रा में गड्ढे में मिलाते रहना चाहिए.
- सिलपौलिन शीट का इस्तेमाल करने से अजोला की पैदावार के दौरान कीट और बीमारियों का आक्रमण बहुत कम पाया जाता है. अजोला में कीट और बीमारियां होने पर यूरोडान 10 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी तरह अजोला को वैभेस्टिन घोल के साथ मिलाकर डालने से फफूंद को भी फैलने से रोका जा सकता है.
- अगर अजोला पर कीट का हमला हो जाए तो पूरी क्यारी को साफ कर देना चाहिए और नये सिरे से नई जगह पर क्यारी बनानी चाहिए.
पशु-मुर्गी को अजोला खिलाने का तरीका
- अजोला से भरी ट्रे को एक बाल्टी के उपर रखकर पानी से अच्छे से धोना चाहिए. गोबर का गंध निकलनी चाहिए. धोने से छोटे-छोटे पौधे भी निकाल देने चाहिए. बाल्टी में जमा हुए पानी और छोटे-छोटे पौधों को दोबारा से गड्ढे में दबा देना चाहिए.
- ताजी अजोला को पशु दाने के साथ 1:1 के अनुपात में मिलाकर पशु को खिलाना चाहिए.
- ताजा अजोला पोल्ट्री (लेयर और ब्रॉयलर) को भी खिलाया जा सकता है.
- अजोला को पशुओं के सामान्य दाने के साथ 1:1 अनुपात में मिलाकर एक सप्ताह तक देने से दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है.
- गर्मियों में दाने के साथ अजोला मिलाने से दूध में बढ़ोतरी के साथ ही पशुओं की हैल्थ में भी बदलाव आता है.
- गांव में, शहरी घर या पशुओं के बाड़े में कहीं भी अजोला का उत्पादन किया जा सकता है.
- अजोला पशुओं के साथ-साथ मुर्गियों के लिए भी उत्तम आहार है.
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