बकरी पालन से मिला रोजगारगायों की लंपी बीमारी के चलते पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है. वहीं खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी को लेकर भी अलर्ट जारी हो चुका है. ऐसे में खतरा बकरे-बकरियों पर भी मंडरा रहा है. क्योंकि एफएमडी बीमारी उन पशुओं को होती है जिनके खुर होते हैं और खुर के बीच में गैप यानि जगह होती है. इस तरह के पशुओं पर एफएमडी बीमारी जरूर अटैक करती है. इस महीने में रुक-रुककर बारिश भी हो रही है. बारिश एफएमडी बीमारी को और बढ़ाती है. इसलिए खतरा और भी ज्यादा है.
वहीं इसी महीने में मौसम भी बदलेगा. किसी भी बीमारी की चपेट में आने के लिए ये कारण बहुत होते हैं. क्योंकि मौसम कोई भी हो, लेकिन बड़ी बकरियों के मुकाबले उनके छोटे बच्चों की देखभाल करना बड़ा मुश्किंल होता है. कई तरह की ऐसी बीमारियां हैं जो बकरी के बच्चों को जल्दी चपेट में ले लेती हैं. जैसे निमोनिया, हालांकि माना जाता है कि निमोनिया बीमारी ज्यादातर सर्दियों के मौसम में होती है.
साइंटिस्ट का कहना है कि जब गर्मियां शुरू होती हैं तो तापमान अचानक तेजी के साथ बढ़ने लगता है. ऐसे मौसम में खासतौर पर बकरी के बच्चे (मेमने) अपने को उस मौसम में नहीं ढाल पाते हैं. जिसके चलते वो निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. निमोनिया शुरू होते ही उन्हें बुखार आने लगता है, नाक बहती है और सांस लेने में परेशानी होती है. जैसे ही यह लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही डॉक्टर के पास ले जाएं. जब तक डॉक्टर दवाई खिलाने की कहे तो बकरी के बच्चे को लगातार बिना गैप के उसे दवाई खिलाएं.
निमोनिया से बचाव के लिए गोट साइंटिस्ट का कहना है कि गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले तो बकरी पालक को बकरियों के आवास में बदलाव करना चाहिए. बकरियों के शेड को इस तरह से ढक दें कि उसमे गर्म हवाएं आसानी से न आएं. दूसरा यह कि दोपहर एक बजे से चार बजे तक बकरियों और उनके बच्चों को चराने न ले जाएं. सुबह और शाम में ही बकरियों को चराने ले जाएं. पानी खूब पिलाएं. ध्यान रहे कि मौसम के चलते पानी गर्म न हो. क्योंकि गर्मी के मौसम में बकरियों के चरने के वक्त में कमी आ जाती है तो उन्हें शेड में ही भरपूर चारा दें. कोशिश करें कि इस दौरान बकरियों और उनके बच्चों को पूरा न्यूट्रिशन दें. इसके लिए चाहें तो पैलेट्स फीड भी खिला सकते हैं.
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