Shrimp Farming: झींगा किसानों का सरकार को अल्टीमेटम, MSP तय करो वरना तालाब रहेंगे खाली

Shrimp Farming: झींगा किसानों का सरकार को अल्टीमेटम, MSP तय करो वरना तालाब रहेंगे खाली

आंध्र प्रदेश के झींगा किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बढ़ती लागत और गिरती कीमतों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अप्रैल से जून तक ‘क्रॉप हॉलिडे’ पर जाएंगे. किसान झींगे के लिए MSP और चारे की कीमतों में राहत की मांग कर रहे हैं.

Advertisement
Shrimp Farming: झींगा किसानों का सरकार को अल्टीमेटम, MSP तय करो वरना तालाब रहेंगे खालीझींगा किसानों की चेतावनी: MSP नहीं तो अप्रैल से ‘क्रॉप हॉलिडे’

आंध्र प्रदेश में झींगा पालने वाले किसानों ने धमकी दी है कि अगर सरकार बढ़ती उत्पादन लागत और झींगे की गिरती कीमतों को लेकर उनकी चिंताओं को दूर नहीं करती है, तो वे अगले साल अप्रैल से जून तक इसकी खेती बंद कर देंगे. 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश राज्य एक्वा किसान संघ ने 7 सितंबर को राज्य के कई जिलों के किसानों के साथ हुई बैठक में इस कदम पर सहमति जताई.

संघ के अध्यक्ष जी. गांधी भगवान राजू ने कहा कि झींगे के चारे, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ खराब क्वालिटी वाले झींगा बीज के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जबकि दूसरी ओर झींगे की कीमतें तेजी से गिरी हैं.

किसानों के इस समूह ने सरकार से झींगे के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और खेती की लागत कम करने के लिए दखल देने की मांग की. साथ ही, उन्होंने चारा बनाने वाली कंपनियों से कीमतें कम करने को भी कहा.

संघ ने कहा कि अगर सरकार सितंबर के आखिर तक उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है, तो किसान तीन महीने की 'क्रॉप हॉलिडे' (खेती से ब्रेक) लेंगे.

अदालत पहुंचा झींगे का मामला

इस बीच, 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के अनुसार, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 8 सितंबर को झींगे के चारे की कीमतों में बढ़ोतरी पर अस्थायी रोक लगा दी. कोर्ट ने प्रॉन फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और उससे जुड़ी कंपनियों को आदेश दिया कि वे अगले आदेश तक चारे की कीमतें 12 जून के सर्कुलर में तय कीमतों के अनुसार ही रखें.

यह अंतरिम आदेश एक याचिका के बाद आया, जिसमें वन्नामेई झींगा चारे के लिए प्रति मीट्रिक टन (MT) 9,000 रुपये (94 USD, 81 EUR) और ब्लैक टाइगर झींगा चारे के लिए प्रति MT 12,000 रुपये (126 USD, 108 EUR) की बढ़ोतरी को चुनौती दी गई थी.

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि आंध्र प्रदेश राज्य एक्वाकल्चर विकास प्राधिकरण (APSADA) अधिनियम, 2020 के तहत, एक्वाकल्चर चारे, बीज और खेती की अन्य चीजों की कीमतें तय करना पूरी तरह से प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है.

जस्टिस एन. हरिनाथ ने अंतरिम आदेश जारी कर प्रॉन फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन को संशोधित दरें लागू करने से रोक दिया और निर्देश दिया कि चारा 12 जून के सर्कुलर में तय कीमतों पर ही बेचा जाता रहे.

कोर्ट ने अगली सुनवाई 30 सितंबर के लिए तय की है.

आंध्र प्रदेश में झींगा उत्पादन

आंध्र प्रदेश भारत के एक्वाकल्चर सेक्टर का मुख्य केंद्र है, जहां देश के कुल खेती वाले झींगे का लगभग 70% से 80% उत्पादन होता है. किसान मुख्य रूप से 'लिटोपेनियस वैनमेई' (पैसिफिक व्हाइट श्रिम्प) पालते हैं, जो राज्य के कुल उत्पादन का 80% से अधिक हिस्सा है.

कृष्णा-गोदावरी नदी का डेल्टा इसका मुख्य केंद्र है. वेस्ट गोदावरी सबसे अधिक उत्पादन करने वाला जिला है, इसके बाद कृष्णा, गुंटूर, प्रकाशम और नेल्लोर का नंबर आता है.

इस इलाके में साल में दो से तीन फसलें ली जाती हैं. डेल्टा इलाकों में फार्म 10 से 25 ppt (पार्ट्स पर हजार) खारेपन वाले पानी का इस्तेमाल करते हैं.

अधिक उत्पादन के लिए चारे और बीज की क्वालिटी सबसे जरूरी बातें हैं. गर्मियों की गर्मी में ऑक्सीजन का लेवल बनाए रखने के लिए तालाब में हवा का बहाव (एरेशन) बहुत अधिक करना पड़ता है. पकड़े गए अधिकांश झींगों को प्रोसेस करके विदेशों में भेजा जाता है, जिसमें अमेरिका एक बड़ा खरीदार है.

POST A COMMENT