मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथउत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और गोशालाओं की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास पर उनसे मुलाकात कर गोवंश संरक्षण, गोशाला प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य और आगे की कार्ययोजना को लेकर चर्चा की. बैठक में गोशालाओं की नियमित निगरानी, पशुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और बीमारी से बचाव पर विशेष जोर दिया गया. इस चर्चा में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त, उपाध्यक्ष अतुल सिंह और महेश शुक्ल सहित राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल शामिल रहे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोशालाओं का निरीक्षण केवल कमियां खोजने तक सीमित नहीं होना चाहिए. निरीक्षण के बाद सामने आई कमियों को समय पर दूर करना भी जरूरी है. उन्होंने गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण, साफ-सफाई, हरे चारे और भूसे की उपलब्धता, पीने के पानी और आश्रय की व्यवस्था की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए. बीमार और कमजोर गोवंश के लिए अलग से विशेष देखभाल की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया. इसके साथ ही नर, मादा, युवा और बीमार गोवंश की जरूरत के अनुसार अलग-अलग रखने और उनकी देखभाल की व्यवस्था को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की बात कही गई.
गोवंश को बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं. खासतौर पर लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया. गोवंश के स्वास्थ्य की नियमित जांच और बीमारी की स्थिति में तुरंत इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए. काम में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है.
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से घायल होने वाले गोवंश के लिए हर जिले में आपातकालीन बचाव और उपचार व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई. इसका उद्देश्य घायल पशुओं को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर उनका उपचार कराना है. बैठक में पंचगव्य यानी दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई. इसके लिए मथुरा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय और गो-अनुसंधान संस्थान और लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में शोध और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की बात कही गई.
गोवंश संरक्षण को केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय किसानों और गोपालकों को भी इससे जोड़ने पर जोर दिया गया. मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत 10 गोवंश रखने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर कैटल शेड, बायोगैस प्लांट और यूरिन टैंक जैसी सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सालभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गोचर और चारागाह भूमि के विकास और स्थानीय किसानों के माध्यम से चारा उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.
बैठक में गोबर और गोमूत्र को उपयोगी जैव-संसाधन के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में भी कई सुझाव दिए गए. किसानों और पशुपालकों को जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत और प्राकृतिक कीट नियंत्रक जैसे उत्पाद तैयार करने से जोड़ने की बात कही गई. इसके साथ ही गोबर से बायोगैस और जैव-ऊर्जा तैयार करने को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया. इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में काम किया जा सकता है.
गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाले उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और मूल्यवर्धन से NRLM महिला स्वयं सहायता समूहों, FPOs, किसानों और पशुपालकों को जोड़ने के सुझाव भी दिए गए. इससे गो-आधारित उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और गांवों में छोटे स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा सकती है. ऐसे में बैठक में गोवंश के बेहतर स्वास्थ्य, गोशालाओं की सुविधाओं में सुधार, समय पर टीकाकरण, चारे की उपलब्धता, आपातकालीन उपचार और गोबर-गोमूत्र के उपयोग के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
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