
आज वर्ल्ड प्रोटीन डे है. एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक देश में ज्यादातर लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं. सरकार भी प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए कई तरह के अभियान चला रही है. हैल्थ एक्सपर्ट की मानें तो बच्चा हो या बड़ा, महिला या फिर पुरुष, सभी को प्रोटीन की रोजाना जरूरत होती है. ऐसा नहीं है कि किसी एक दिन ज्यादा प्रोटीन ले लिया और दूसरे दिन कम लिया तो काम चल जाएगा. हर रोज कितना प्रोटीन बॉडी को चाहिए ये तय होता है इंसान के वजन से. अगर किसी का वजन 70 किलो है तो उसे दिनभर में 70 ग्राम प्रोटीन चाहिए. डायटीशियन प्रतिभा दीक्षित की मानें तो प्रोटीन सिर्फ दाल-रोटी खाने से नहीं मिलेगा, इसके लिए अंडे-चिकन की भी जरूरत पड़ती है.
इसीलिए पोल्ट्री सेक्टर प्रोटीन के संबंध में लगातार जागरुकता कार्यक्रम चलाता रहता है. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) प्रेसिडेंट रनपाल डाहंडा का कहना है कि कार्यक्रम का मकसद देश के लोगों में हो रही प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए जागरुक करना है. आज हमारे देश के 73 फीसद शहरी लोगों में प्रोटीन की कमी है. जबकि डायटीशियन का कहना है कि हमारे देश में लोग हर रोज औसत 47 ग्राम प्रोटीन ही खा रहे हैं. जो कि जरूरत के हिसाब से बहुत कम है.
रनपाल ढांढा का कहना है कि एक अंडा छह से सात रुपये का आता है. और एक अंडे में 13 ग्राम प्रोटीन होता है. इतने रुपये में और कोई खाने की चीज ऐसी नहीं है जो पूरा का पूरा 13 ग्राम शरीर को प्रोटीन देती हो. और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये कि इसमे किसी भी तरह की कोई मिलावट नहीं होती है. अंडा हो या चिकन कोई उसमे किसी भी तरह की मिलावट नहीं कर सकता है. चिकन 240 रुपये किलो मान लें तो 24 रुपये के 100 ग्राम चिकन में 27 ग्राम प्रोटीन मिलता है.
वर्ल्ड पोल्ट्री वेटरनरी एसोसिएशन के प्रसिडेंट डॉ. जितेन्द्रा वर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया पर चिकन और एंटीबायोटिक्स् को लेकर तमाम तरह की बातें की जाती हैं. जैसे एंटीबायोटिक्स दवाई खिलाकर मुर्गे को कम वक्त में ज्यादा वजन का तैयार कर लिया जाता है. इतना ही नहीं ये भी कहा जाता है कि मुर्गों को कुछ ऐसे हॉर्मोन दिए जाते हैं जिससे वो जल्दी बड़े हो जाते हैं और हेल्दी दिखने लगते हैं.
जबकि ये पूरी तरह से गलत है. हॉर्मोन और एंटीबायोटिक्स इतने महंगे आते हैं कि पोल्ट्री के बाजार रेट को देखते हुए उनका इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं है. सिर्फ दवाई के तौर पर कुछ दो-तीन ऐसी एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं जिनका इंसानी शरीर से कोई मतलब नहीं है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि वैसे तो हर इंसान कुछ भी खाने के लिए फ्री है. लेकिन जो खा सकते हैं तो उन्हें अपनी प्रोटीन की जरूरत उस सोर्स से करनी चाहिए जो कम मात्रा में होने के बाद भी ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन देता है.
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