बुंदेलखंड में ‘श्वेत क्रांति’ की नई इबारत, 95 हजार महिला डेयरी किसानों को 5.63 करोड़ की प्रोत्साहन राशि

बुंदेलखंड में ‘श्वेत क्रांति’ की नई इबारत, 95 हजार महिला डेयरी किसानों को 5.63 करोड़ की प्रोत्साहन राशि

बुंदेलखंड की 95 हजार महिला डेयरी किसानों को बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी ने 5.63 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की. समारोह झांसी में आयोजित हुआ, जहां महिला सशक्तिकरण, डेयरी विकास और ‘श्वेत क्रांति’ की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणा की गई. जानें कैसे बदल रहा है बुंदेलखंड का डेयरी मॉडल.

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बुंदेलखंड में ‘श्वेत क्रांति’ की नई इबारत, महिला डेयरी किसानों को मिली 5.63 करोड़ की प्रोत्साहन राशिबलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी ने प्रोत्साहन राशि वितरीत की

बुंदेलखंड की धरती पर महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया. बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा ग्रीष्मकालीन दुग्ध प्रोत्साहन योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत क्षेत्र की 95 हजार महिला डेयरी किसानों को कुल 5 करोड़ 63 लाख 92 हजार 624 रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ किया गया. इस अवसर पर झांसी के पंडित दीनदयाल सभागार में भव्य दुग्ध उत्पादक महिला किसान संवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें महिला किसानों की भागीदारी और उत्साह देखने लायक रहा.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और झांसी-ललितपुर के सांसद अनुराग शर्मा रहे. समारोह में बड़ी संख्या में महिला डेयरी किसान, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे.

5-6 महिलाओं से शुरुआत, आज 95 हजार से अधिक सदस्य

बलिनी मिल्क प्रोड्‌यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ . ओपी सिंह ने बताया कि बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की शुरुआत वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा की गई थी. उस समय महज 5-6 महिलाओं से शुरू हुई यह पहल आज बुंदेलखंड के सातों जनपदों में फैल चुकी है और करीब 95 हजार महिलाएं इससे जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं.

कंपनी का वार्षिक टर्नओवर, जो शुरुआत में लगभग 25 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 700 करोड़ रुपये के करीब पहुंचने वाला है. यह आंकड़ा न केवल संगठन की सफलता दर्शाता है, बल्कि बुंदेलखंड में डेयरी क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भी प्रमाण है.

अधिकारियों ने बताया कि ग्रीष्मकालीन दुग्ध प्रोत्साहन राशि का भुगतान अक्टूबर-नवंबर में पूरा हो चुका था, लेकिन होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए इसका वितरण समारोह फरवरी में आयोजित किया गया, ताकि त्योहार से पहले महिलाओं के घरों में अतिरिक्त आय पहुंचे और वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें. उन्होंने कहा, “होली खुशियों और रंगों का त्योहार है. यदि इस समय महिलाओं को बोनस के रूप में प्रोत्साहन राशि मिलेगी तो उनके घरों में रंग-बिरंगी खुशियां आएंगी. यही हमारी मंशा है.

आयोजन में लगा फाग गीत और बुंदेली नृत्य का तड़का

वहीं इस आयोजन में होली के मौके पर फाग गीत और बुंदेली नृत्य देखने को मिला, जहां पर राधा ग्रुप की ओर से राई नृत्य प्रस्तुत किया गया, उनकी टीम की तरफ से सुंदर फाग गीतों का आयोजन हुआ, जिसे देख वहां मौजूद सभी लोग झूम उठे.

सूखे और पलायन की पहचान बदल रहा बुंदेलखंड

कभी सूखा, गरीबी और पलायन के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड में अब डेयरी क्षेत्र के माध्यम से नई ‘श्वेत क्रांति’ का आगाज हो चुका है. बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी महिलाओं को संगठित कर न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है.

कंपनी का लक्ष्य महिलाओं के लिए एक स्वतंत्र और सशक्त डेयरी मॉडल विकसित करना है, जिससे आने वाले समय में बुंदेलखंड डेयरी टूरिज्म के रूप में भी पहचान बना सके.

महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव

यह कार्यक्रम केवल प्रोत्साहन राशि वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला किसानों के साथ संवाद और सम्मान का मंच भी बना. इससे महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास हो रहा है. बलिनी की यह पहल स्पष्ट करती है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती हैं. बुंदेलखंड में ‘श्वेत क्रांति’ की यह कहानी आने वाले वर्षों में प्रदेश के विकास मॉडल की प्रेरक मिसाल बन सकती है.(अजय झा का इनपुट)

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