मक्के की अफ्रीकन टॉल किस्मगर्मियों में के दौरान भेड़-बकरियों को हरे चारे की कमी हो जाती है. फोडर एक्सपर्ट इसके पीछे दो बड़ी वजह बताते हैं, एक तो मौसम के चलते हरे चारे का उत्पादन कम हो जाता है और दूसरा ये कि गर्मी के चलते भेड़-बकरियों का खुले में निकलना कम हो जाता है. यही वजह है कि पशुपालक छोटा हो या बड़ा, सभी की परेशानी हरे चारे को लेकर ही रहती है. इंडियन ग्रासलैंड एंड फोडर रिसर्च इंस्टीट्यूट, झांसी से जुड़े एक्सपर्ट का भी कहना है कि देश में हरे और सूखे चारे की कमी देखी जा रही है. यहां तक की बाजारों में खल की भी कमी हो गई है.
एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी चारे की फसल को काटने पर वो बाजार में एक-दो महीने तक तो उपलब्ध रहता है, लेकिन फिर उसकी कमी होने लगती है और महंगा भी हो जाता है. इसी कमी को पूरा करने के लिए केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा ने हरा चारा स्टोर करने के कुछ साइंटीफिक तरीकों पर रिसर्च की है. सीआईआरजी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट का कहना है कि पशुपालक थोड़ी सी सजगता और मेहनत से अपने पशुओं को पूरे साल सस्ता हरा चारा खिला सकते हैं.
सीआईआरजी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि बरसीम, ओट और चरी पतले तने वाली चारे की फसल हैं. इन्हें आसानी से सुखाकर स्टोर किया जा सकता है. लेकिन किसी भी चारे की फसल को स्टोर करते वक्त इस बात का भी खास ख्याल रखें कि स्टोर किए जा रहे चारे की मात्रा उतनी ही हो कि चारे की आने वाली नई फसल तक स्टोर किया गया चारा खत्म हो जाए.
साइंटिस्ट डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि हरा चारा स्टोर करने और उसका साइलेज बनाने के लिए उसके पत्तों को पहले सुखा लें. लेकिन ख्याल रहे कि जिस चारे को हम साइलेज बनाने जा रहे हैं उसे पकने से कुछ दिन पहले ही काट लें. इसके बाद उसे धूप में सुखाने रख दें. लेकिन चारे को सुखाने के लिए कभी भी उसे जमीन पर रखकर न सुखाएं. चारा सुखाने के लिए जमीन से कुछ ऊंचाई पर जाली वगैरह रखकर उसके ऊपर चारे को डाल दें.
इसे लटका कर भी सुखाया जा सकता है. क्योंकि जमीन पर डालने से चारे पर मिट्टी लगने का खतरा रहेगा जो फंगस आदि की वजह बन सकती है. जब चारे में 15 से 18 फीसद के आसपास नमी रह जाए तो उसे सूखी जगह पर रख दें. इस बात का ख्याल रहे कि अगर चारे में नमी ज्यादा रह गई तो उसमे फंगस आदि लग जाएंगे और चारा खराब हो जाएगा. इतना ही नहीं इस खराब चारे को गलती से भी पशु ने खा लिया तो वो बीमार हो जाएगा.
डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि घर पर ही चारे से हे भी बड़ी ही आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन जरूरत है बस थोड़ी सी जागरुकता की. जैसे पतले तने वाले चारे की फसल को पकने से पहले ही काट लें. उसके बाद तले के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए. हे के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें.
क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है. यानि चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हेंय अच्छीि तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
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