Milk Rate: गर्मियों में ही क्यों बढ़ जाते हैं दूध के दाम, फ्लश सिस्टम है बड़ी वजह 

Milk Rate: गर्मियों में ही क्यों बढ़ जाते हैं दूध के दाम, फ्लश सिस्टम है बड़ी वजह 

Milk Rate दूध उत्पादन के मामले में देश नंबर वन है. लेकिन खासतौर पर गर्मियों के दौरान डिमांड ज्यादा और दूध की कमी होने लगती है. दूध के दाम भी इसी दौरान ज्यादा बढ़ते हैं. हालांकि इसके पीछे डेयरी एक्सपर्ट से लेकर सभी के अपने अलग-अलग तर्क हैं. डेयरी के फ्लश सिस्टम और हरे चारे को मुख्य वजह के तौर पर देखा जाता है.

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Milk Rate: गर्मियों में ही क्यों बढ़ जाते हैं दूध के दाम, फ्लश सिस्टम है बड़ी वजह On Friday, shares of Dodla Dairy closed 0.31 per cent lower at Rs 1,224.85 on the BSE, dipping from the previous close of Rs 1,228.70.

अक्सर देखा जाता है कि डेयरी कंपनियां गर्मी आते ही दूध के दाम बढ़ा देती हैं. कई बार तो ऐसा भी होता है कि गर्मियों के दौरान डेयरी कंपनियां दो-दो बार दाम बढ़ाती हैं. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो दूध के दाम बढ़ने के पीछे बड़ी वजह बाजार की डिमांड और डेयरी का फ्लश सिस्टम होता है. फ्लश सिस्टम में दूध पाउडर और बटर रखा जाता है. डेयरी कंपनियां दूध पाउडर और बटर का स्टोर तब करती हैं जब उनके पास डिमांड से ज्यादा दूध आने लगता है. उस दूध में से बटर निकालकर अलग कर दिया जाता है. इस तरह पाउडर और बटर को बड़े-बड़े फ्रीजर में अलग-अलग रखा जाता है. और जब गर्मियों में दूध की कमी होती है और डिमांड बढ़ जाती है तो इसी फ्लश सिस्टम का इस्तेमाल कर फिर से उसे दूध बना दिया जाता है. अब दो बार के इस पूरे प्रोसेस और स्टोर करने पर मोटा खर्च आता है. 

इसी खर्च को बराबर करने और डेयरी किसानों को मुनाफा देने के लिए कंपनियां दो रुपये प्रति लीटर तक दूध के दाम बढ़ा देती हैं. क्योंकि गर्मियों में दूध की कमी होने का कारण सिर्फ हरा चारा नहीं होता है. हरे चारे की कमी को काफी हद तक साइलेज से पूरा कर लिया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है गाय-भैंस का स्ट्रेस में आना. गर्म मौसम और उसमे भी उतार-चढ़ाव के चलते पशु जल्दी स्ट्रेस में आ जाता है. जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. दही-छाछ के रूप में डिमांड भी बढ़ जाती है.   

बढ़ती कीमत पर ये बोले IDA प्रेसिडेंट

इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. सुधीर सिंह ने किसान तक को बताया कि दूध के दाम बढ़ने के पीछे एक नहीं कई वजह होती हैं. सबसे पहली तो ये कि चारे के दाम बढ़ जाते हैं. जिससे दूध की लागत में बढ़ोतरी हो जाती है. गर्मियों में उत्पादन भी कम हो जाता है. बाजार में दूध और दूध से बने प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ जाती है. इन्हीं परेशानियों से निपटने के लिए डेयरी कंपनियों में फ्लश सिस्टम बनाया जाता है.

फ्लश सिस्टम के तहत पहले दूध से बटर और दूध पाउडर बनाया जाता है. इसे बड़े फ्रीजर में स्टोर करके रखा जाता है. और जब गर्मियों में दूध की कमी महसूस होती है तो इसी बटर और दूध पाउडर को दोबारा से मिलाकर दूध बना दिया जाता है. इस सब पर करीब 4 से 5 रुपये प्रति लीटर का खर्च आता है.

अब दूध बेचने के दौरान इस खर्च को भी निकालना है और किसानों को भी उनके दूध का सही दाम देना है. इसलिए गर्मियों में दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ जाते हैं. सर्दियों में जब दूध उत्पादन ठीक-ठाक हो रहा होता है तो ऐसे वक्त में कंपनियां इमरजेंसी के लिए फ्लश सिस्टम में बटर और दूध पाउडर बनाकर रखती हैं.  

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