कई पेड़ों की हरी पत्तियां बकरियों के लिए दवाई की तरह से हैं. फोटो क्रेडिट-किसान तकगर्मी के मौसम में बकरी के बच्चों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जो बकरी के बच्चे खुले मैदान में चरने नहीं जा पाते हैं तो उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसमे खासतौर से पेट से जुड़ी बीमारियां होती हैं. जैसे गर्मियों में बच्चों को दस्त होना, पेट में कीड़े पड़ना और आए दिन पेट खराब रहना प्रमुख है. जो खुले में चरने जाते हैं तो वो कई तरह के पेड़ों की पत्ति यों को खा लेते हैं, जो चारे के साथ-साथ दवाई का भी काम करती हैं. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बहुत सारे पेड़-पौधे और बेल ऐसी हैं जिनके पत्ते सिर्फ चारे ही नहीं दवाई का काम भी करते हैं.
एक्सपर्ट का दावा है कि अगर वक्त पर हर हरे चारे को बकरी और उनके बच्चे खाते रहें तो जल्दी-जल्दी बीमार नहीं पड़ेंगे. कई सारी बीमारियां भी दूर रहेंगी. जरूरत बस इतनी है कि रोजाना की खुराक में जरूरत के हिसाब से इन्हें शामिल कर लिया जाए. हालांकि ये बकरी के नेचर में ही होता है कि बीमार होने पर जरूरत के मुताबिक उस पेड़-पौधे की पत्तियों को खुद ही खा लेती है.
सीआईआरजी के गोट एक्सपर्ट का कहना है कि अमरुद,नीम और मोरिंगा में टेनिन कांटेंट और प्रोटीन की मात्रा बहुत होती है. अगर वक्त पर हम तीनों पेड़-पौधे की पत्तियां बकरियों को खिलाते हैं तो उनके पेट में कीड़े नहीं होंगे. पेट में कीड़े होना बकरे और बकरियों में बहुत ही परेशान करने वाली बीमारी है. पेट में अगर कीड़े होंगे तो उसके चलते बकरे और बकरियों की ग्रोथ नहीं हो पाएगी. पशुपालक जितना भी बकरे और बकरियों को खिलाएगा वो उनके शरीर को नहीं लगेगा. खासतौर पर जो लोग बकरियों को फार्म में पालते हैं और स्टाल फीड कराते हैं उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना होगा.
गोट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हम खुले मैदान में या फिर किसी जंगल में जाएं तो हमे नीम गिलोय दिख जाएगा. यह नीम के पेड़ पर ही पाया जाता है. शायद इसीलिए इसे नीम गिलोय भी कहा जाता है. स्वाद में यह कड़वा होता है. अगर हम नीम गिलोय की पत्तियां बकरी के बच्चों को खिलाएं तो उनके शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत आ जाएगी. यह बच्चे जल्द ही बीमार भी नहीं पड़ेंगे. जिसके चलते पशुपालक बकरियों की मृत्य दर को कम कर सकेंगे. यह हम सभी जानते हैं कि बकरी पालन में सबसे ज्यादा नुकसान बकरी के बच्चों की मृत्य दर से ही होता है.
Meat Production: पश्चिम बंगाल नहीं, UP को दिया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट
PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today