Profit from Dairy Milk: अमित शाह बोले, प्राइवेट डेयरी नहीं मिल्क कोऑपरेटिव से पशुपालकों को मिलता है मुनाफा

Profit from Dairy Milk: अमित शाह बोले, प्राइवेट डेयरी नहीं मिल्क कोऑपरेटिव से पशुपालकों को मिलता है मुनाफा

Profit from Dairy Milk हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने डेयरी सेक्टर में होने वाले मुनाफे को लेकर बड़ी बात कही है. उनका साफ-साफ इशारा है कि पशुपालन करने वालों को मुनाफा सिर्फ कोऑपरेटिव से ही होता है. जबकि प्राइवेट डेयरी में मुनाफा कितना भी हो लेकिन उसका फायदा पशुपालकों को नहीं मिलता है. 

Advertisement
Profit from Dairy Milk: अमित शाह बोले, प्राइवेट डेयरी नहीं मिल्क कोऑपरेटिव से पशुपालकों को मिलता है मुनाफाग्रामीण महिलाओं को मिली आर्थिक मजबूती

हाल ही में केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने डेयरी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. अपने बयान में उन्होंने पशुपालकों को होने वाले मुनाफे का जिक्र किया है. उनका कहना है कि पशुपालन के काम से जुड़ी माता और बेटियों को दूध बेचकर मोटा मुनाफा सिर्फ कोऑपरेटिव डेयरी से मिलता है. जबकि प्राइवेट डेयरी का टर्नओवर कितना भी बढ़ जाए, लेकिन पशुपालकों को एक तय रकम ही मुनाफे के तौर पर मिलती है. ये प्राइवेट और कोऑपरेटिव डेयरी में बुनियादी अंतर है. अपने इस बयान पर उन्होंने कोऑपरेटिव डेयरी अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि अमूल में पूरा का पूरा मुनाफा पशुपालन करने वालों के हाथों में जाता है.

हाल ही में कोऑपरेटिव से जुड़ी भारत टैक्सी से जुड़े एक कार्यक्रम में उन्होंने ये बात कही है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो देशभर में आठ करोड़ परिवार दूध उत्पादन के काम से जुड़े हैं. इसमे से करीब डेढ़ करोड़ परिवार ही डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़े हुए हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि बाकी के 6.5 करोड़ परिवारों को दूध का सही दाम नहीं मिल पा रहा है.

बढ़ाया जाए डेयरी किसानों का मुनाफा 

एक अन्य कार्यक्रम में अमित शाह पहले भी बोल चुके हैं कि कोऑपरेटिव डेयरी क्षेत्र में उपभोक्ता के पास से आने वाले पैसे में से 75 फीसद से ज्यादा किसानों को वापस मिलता है. जबकि कॉर्पोरेट सेक्टर में किसानों को सिर्फ 32 फीसद पैसा ही वापस मिलता है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि हमें देश के हर किसान के लिए इस अंतर को कम करने का लक्ष्य रखना चाहिए. इसके साथ ही कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े डेयरी किसानों से  16 करोड़ टन गोबर को हमारे कोऑपरेटिव के नेट में लाने की कोशि‍श करनी चाहिए.

डेयरी किसानों का मुनाफा बढ़ाने को उठाया ये कदम 

पशुपालक और डेयरी किसानों की इनकम बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर आसानी से वित्तीय सहायता मिल जाए इसके लिए पशुपालकों के खाते कोऑपरेटिव बैंकों में खोलने के लिए Cooperation Amongst Cooperatives की शुरूआत की है. आज गुजरात में 93 फीसद संस्थाओं के खाते सहकारी बैंकों में खुले हुए हैं. इससे सहकारिता के लिए अपने आप धन भी उपलब्ध हुआ है और बैंक भी मज़बूत हुए हैं. इतना ही नहीं गुजरात में माइक्रो ATM के मॉडल से प्रदेश के पशुपालकों को बड़ा फायदा मिल रहा है. 

Meat Production: पश्च‍िम बंगाल नहीं, UP को द‍िया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट 

PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत 

POST A COMMENT