Animal Care in July: पशुपालन में आज से ही अपनाएं एक्सपर्ट के ये 12 टिप्स, बढ़ जाएगा दूध उत्पादन Animal Care in July: पशुपालन में आज से ही अपनाएं एक्सपर्ट के ये 12 टिप्स, बढ़ जाएगा दूध उत्पादन
Animal Care in July मॉनसून में गाय-भैंस का सिर्फ दूध उत्पादन ही नहीं कम होता है, बल्कि जुलाई को ध्यान में रखकर ही पशुपालक पशुओं को गाभिन कराते हैं. इस महीने में भैंस बच्चा देने वाली होती हैं. यही वो महीना है जब मौसम बदलता है. मौसम बदलने के साथ ही कई तरह की बीमारियां भी आती हैं. कई बार तो बरसाती बीमारियां पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो जाती हैं.
यूपी में देसी गाय की डेयरी खोलने का सुनहरा मौकानासिर हुसैन - New Delhi,
- Jul 21, 2026,
- Updated Jul 21, 2026, 12:15 PM IST
ऐसा माना जाता है कि मॉनसून के दौरान गाय-भैंस का दूध उत्पादन और दूध की क्वालिटी दोनों ही गिर जाते हैं. दूध में फैट की मात्रा कम हो जाती है, दूध पानी जैसा दिखने लगता है. साथ ही अगर दिनभर में भैंस 12 लीटर दूध देती है तो मॉनसून में फिर वो 8-9 लीटर ही दूध देती है. जबकि पशुपालक की लागत उतनी ही रहती है. यही वजह है कि दूध देने और जुगाली करने वाले पशुओं के लिए जुलाई बहुत ही खास महीना माना जाता है. क्योंकि भैंसों के प्रजनन के लिए भी जुलाई का महीना बहुत अहमियत रखता है.
मॉनसून के दौरान पशुपालन से जुड़ी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए ही पशुपालन से जुड़ी सरकारी विभाग हर महीने की एडवाइजरी जारी करते हैं. सरकार की ओर से पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण की सलाह दी जाती है. पशु चिकित्सा केन्द्र पर ही नहीं पशुओं के बाड़े में जाकर भी टीकाकरण कराने की सुविधा सरकार की ओर से दी जाती है.
जुलाई में पशुपालक जरूर करें ये काम
- जुलाई में बारिश हो रही है, इसलिए पशु परिसर को सूखा एवं साफ रखना चाहिए.
- गर्मी और नमी वाली संक्रमित बीमारियों से पशुओं को बचाना चाहिए.
- बारिश की वजह से जुलाई में परजीवी और बाहरी परजीवी का असर काफी ज्यादा होता है. ऐसे में संबंधित रोगों से बचाव करना बहुत ही जरूरी होता है.
- जुलाई में ज्यादातर पशुपालक भैंसों से बच्चा लेते हैं, इसलिए पशुपालकों को प्रजनन संबंधी सावधानी के साथ नवजात की सुरक्षा हेतु पूरी जानकारी प्राप्त होनी चाहिए. गाभिन गाय-भैंस को अलग साफ हवादार सूखा स्थान पर रखना चाहिए.
- जुलाई में अच्दे दूध उत्पादन के लिए जरूरी मात्रा में मिनरल मिक्चर की मात्रा पशु चिकित्सक की सलाह पर दिया जाना चाहिए.
- कम मात्रा में या बिल्कुल भी मिनरल मिक्चर नहीं दिए जाने से पशुओं को बीमारी हो सकती हैं.
- हरे चारे के खेतों में जानवरों को नहीं जाने दें. खासतौर से ज्वार के खेत में नहीं जाने दें.
- लम्बी गर्मी के बाद अचानक से बारिश के बाद जब हरे चारे की बढ़वार होती है उसमें साइनाइड जहर पैदा होने लगता है. इसके चलते चारा जहरीला हो जाता है. ऐसी फसल को समय पूर्व कच्ची अवस्था में न काटें और ना ही जानवरों को खिलायें.
- चारा एक्सपर्ट के मुताबिक जुलाई हरा चारा बोने के लिए सही वक्त होता है.
- हरे चारे की बीज मात्रा 25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ इस्तेमाल करें.
- हर सीजन में पशुओं को खिलाई जाने वाली चारा घासों को जुलाई में लगाया जा सकता है.
- संतुलित पशु आहार के लिए मक्का, बाजरा, लोबिया और ज्वार की एक साथ बोआई करें. इससे आने वाले वक्त में पशुओं के लिए हरे चारे की कमी नहीं होगी.
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