दिवाली पर यूपी में 28 लाख दियों से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी चल रही है.वैसे तो यूपी सरकार की योजना के मुताबिक 35 लाख दीये जलाने का प्लान बनाया गया है. खास बात ये है कि इसमे से 28 लाख दीये जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया जाएगा. वहीं 28 लाख दीये जलाने की जिम्मेदारी डॉ. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी को दी गई है. लेकिन रिकॉर्ड के लिए जलने वाले 28 लाख दीयों में एक भी दीया गोबर से बना नहीं होगा. हालांकि इसके पीछे भी रिकॉर्ड से जुड़ी ही एक वजह है.
जबकि दूसरी ओर यूपी सरकार गाय के गोबर से बने दिये जलाने के आदेश जारी कर रही है. इतना ही नहीं यूपी के पशुपालन विभाग के मंत्री ने खुद सीएम योगी आदित्यनाथ गाय के गोबर से बने दीये और दूसरी चीजें दी हैं. वहीं जानकारों का कहना है कि गोबर से बने दीये जलाने में परेशानी के साथ-साथ जोखिम भी है.
ये भी पढ़ें:मदर डेयरी और उत्तराखंड ने लांच किया गिर-बद्री गाय के दूध से बना घी और ट्रेसेबिलिटी सिस्टम
22 अक्टूबर को प्रमुख सचिव, शासन ने एक पत्र जारी किया है. पत्र के मुताबिक गौशालाओं में गोपूजन के संबंध में कुछ जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. ये सभी निर्देश विधायक, सांसद और मंत्रियों से जुड़े हैं. दिवाली को लेकर पुलिस को भी खास हिदायत दी गई है. पत्र के 6 नंबर पॉइंट पर खासतौर से गाय के गोबर से बने दीये, मूर्ति और दूसरी वस्तुओं का इस्तेमाल दिवाली पर करने की बात कही गई है. वहीं यूपी सरकार की ओर से जारी एक प्रेसनोट में बताया गया है कि पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने खुद जाकर सीएम योगी को प्रतीकात्मक रूप से गाय के गोबर से बने दीये भेंट किए हैं. क्योंकि अयोध्या में भी दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है तो वहां भी 1.5 लाख दीये गाय के गोबर से बने जलाए जाएंगे.
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी, अयोध्या की वाइस चांसलर प्रतिभा को रिकॉर्ड के लिए जलने वाले 28 लाख दीयों को जलवाने की जिम्मेदारी दी गई है. तमाम कॉलेज, यूनिवर्सिटी और एनजीओ के लोगों को जोड़कर करीब 50 हजार से ज्यादा लोग दीये जलाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. लेकिन खास बात ये है कि 28 लाख दीयों में एक भी दीया गाय के गोबर से बना नहीं है. बीते दो साल दीये जलवाने में नोडल अफसर की भूमिका निभाने वाले यूनिवर्सिटी के डीन और हैड प्रोफेसर आशुतोष सिन्हा ने किसान तक से बातचीत में बताया कि दीये जलाने का ये रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज होता है.
उसी के हिसाब से इसकी तैयारी भी की जाती हैं. सबसे पहले हम लोगों ने दीये जलाने का बाबा राम-रहिम का रिकॉर्ड तोड़ा था. इसके बाद हर साल हम लोग खुद अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं. लेकिन ये सभी रिकॉर्ड मिट्टी से बने दीये के हैं. अब अगर इसमे गोबर से बने दीये शामिल किए जाते हैं तो रिकॉर्ड की कैटेगिरी ही अलग हो जाएगी. इसलिए 28 लाख दियों में एक भी दीया गोबर से बना शामिल नहीं किया गया है.
ये भी पढ़ें: मैंने कभी नहीं खाया दिल्ली का पनीर...दिवाली से पहले डेयरी मंत्री ने बताई वजह
तेल कारोबारी लाला गिरधारी लाला गोयल ने बताया कि गोबर से बने दीये सूखने के बाद दिये में डाला जाने वाला तेल बहुत सोख लेते हैं. इसके अलावा सूखा गोबर दीये की बात्ती से आग भी पकड़ लेता है. तीसरी बात ये कि वजह जो भी हो, लेकिन गोबर से बने दीये में बात्ती लगातार ठीक से नहीं जल पाती है. वो बीच-बीच में जलती और बुझती रहती है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today