BHU researchers discover new technique to test milk at home using evaporation(AI generated image)गर्मियों में गाय-भैंस का दूध उत्पादन घट जाता है. अपनी क्षमता के हिसाब से पशु कम दूध देते हैं. इसका एक बड़ा कारण गर्म मौसम के चलते पशुओं का तनाव में आना होता है. और दूसरी वजह है हरे चारे की कमी. बस इसी मौके का फायदा उठाकर मिलावटखोर और सिंथेटिक दूध तैयार करने वाले माफिया सक्रिय हो जाते हैं. ये ऐसी जगहों पर जहां दूध की खपत ज्यादा होती है वहां दूध का खेल शुरू कर देते हैं. अभी मार्च चल रहा है और दूध की भी ऐसी कोई किल्लत सामने नजर नहीं आ रही है, लेकिन बावजूद इसके दूध माफियाओं ने अपना खेल शुरू कर दिया है. पुलिस ने कुछ जगहों पर छापेमारी कर इसका खुलासा किया है. लेकिन इस तरह की घटनाएं न तो पहली होती हैं और न ही आखिरी.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि बहुत जरूरी है कि दूध उपभोक्ता जागरुक हो जाएं. जरा सा भी शक होने पर घर आए दूध की जांच कर लें. दूध किसी भी परिवार और किचिन की रोजमर्रा की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. दिन की शुरुआत दूध के बिना करने की सोचना भी मुश्किल होता है. लेकिन आजकल दूध के प्योर होने पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. दूध में अब सिर्फ पानी की ही मिलावट नहीं होती है, दूध ही सिंथेटिक तरीके से तैयार कर दिया जाता है.
दूध की बूंद को चिकनी सतह पर गिराएं.
अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है.
मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी.
तीन एमएल दूध में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की 10 बूंद मिलाएं.
एक चम्मच चीनी मिलाने के पांच मिनट बाद लाल रंग हो जाएगा.
आयोडीन की कुछ बूंदें दूध में मिलाएं.
मिलाने पर मिश्रण का रंग नीला हो जाएगा.
टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध और सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाएं.
पांच मिनट बाद लाल लिटमस पेपर इसमें डुबोएं.
अगर पेपर का रंग नीला हो जाए तो यूरिया मिला है.
10 एमएल दूध में पांच एमएल सल्फ्यूरिक एसिड मिलाएं.
बैंगनी रंग की रिंग का बनना फॉर्मेलिन होने का संकेत.
दूध लंबे समय तक ठीक रखने के लिए फॉर्मेलिन मिलाते हैं.
सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है.
उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है.
गर्म करने पर पीला पड़ जाता है.
अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग
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