

“संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे.” लगता है कि नेशनल एग कोऑर्डिनेटर कमेटी (NECC) के विज्ञापन की ये लाइन काम कर गई. ऐसा इसलिए कह सकते हैं कि जब से अंडा उत्पादन के आंकड़े रखे जा रहे हैं तो तब से लेकर आज तक अंडा उत्पादन और खपत में 20 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है. लेकिन बीते दो-तीन दिन से अंडा खासा चर्चाओं में है. लेकिन ये चर्चा अंडा खाने से नहीं उसकी एक्सपायरी से जुड़ी हुई है. अंडा भी एक्सपायर होता है. अंडे के भी खराब होने का वक्त उसके रखरखाव के हिसाब से तय है.
इसी को देखते हुए कानून बनाया गया है कि अंडे के ऊपर उसकी एक्सपायरी प्रिंट करनी होगी. अंडा उत्पादन से लेकर स्टोर करने तक की जानकारी देनी होगी. लेकिन इस सब के बावजूद अंडे का उत्पादन और खपत दोनों ही बढ़ रही है. खपत का आंकड़ा 5 अंडों से बढ़कर 106 अंडों पर आ गया है. हालांकि अंडे की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बाद भी डॉक्टर और डायटीशियन इस आंकड़े से खुश नहीं हैं.
पोल्ट्री एक्सपर्ट रिकी थापर का कहना है कि डायटीशियन और डॉक्टर के मुताबिक हर एक इंसान को कम से कम दो अंडे रोजाना खाने चाहिए. कम से कम और आसान डाइट में अंडे से ज्यादा प्रोटीन किसी और चीज में नहीं मिल सकता है. चलते-फिरते, मेट्रो ट्रेन में या बस में बैठकर आराम से खाए जाने वाला अंडा ही है. मेट्रो सिटी की तेज रफ्तार जिंदगी में सबसे आसानी से मिलने और बनने वाले नाश्ते में भी अंडा ही शामिल है. अंड की खपत बढ़ने से जहां लोगों की हैल्थ बनेगी वहीं पोल्ट्री कारोबार भी देश की अर्थव्यवस्था में और ज्यादा योगदान देगा.

केन्द्रीय पशुपालन मंत्रालय की साल 2024-25 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगातार हमारे खाने में अंडों की संख्या बढ़ रही है. साल 1950-51 में हर साल प्रति व्यक्ति के हिस्से में पांच अंडे आते थे. लेकिन आज यानि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 106 हो गई है. हालांकि पोल्ट्री सेक्टर की कोशिश है कि यह संख्या बढ़कर 180 हो जाए. इसके लिए पोल्ट्री संचालकों की संस्था एनईसीसी भी लगातार कोशिश कर रही है.
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