भेड़-बकरियों में तेजी से फैलती है पीपीआर और शीप पॉक्स बीमारी.डेयरी एक्सपर्ट, साइंटिस्ट और पशुपालन एक्सपर्ट लगातार नॉन बोवाइन मिल्क यानि फ्यूचर मिल्क की चर्चा कर रहे हैं. नॉन बोवाइन या फ्यूचर मिल्क वो है जो गाय-भैंस के अलावा दूसरे पशु देते हैं. जैसे भेड़-बकरी, ऊंट, यॉक, गधी आदि. यही वजह है कि पूरी गंभीरता के साथ अब भेड़-बकरी का दूध उत्पादन बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है. अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से भेड़-बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए स्कीम चला रहे हैं. इसी तरह की एक पहल हरियाणा सरकार ने भी शुरू की है.
सरकार का कहना भेड़-बकरी का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को हर संभव मदद दी जाएगी. वहीं सरकार का दावा है कि भेड़-बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनेगा. इसलिए जरूरी है कि भेड़-बकरी के दूध को बढ़ावा दिया जाए. भेड़-बकरी पालन से जुड़ी योजनाओं का फायदा हर एक पशुपालक तक पहुंचाया जाए. किसान पशुपालन से जुड़ें इसके लिए कई लाभकारी योजनाएं बनाई गई हैं.
रोडमैप से जुड़े अफसरों का कहना है कि राज्य में बकरी और भेड़ के दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष केंद्र बनाए जा रहे हैं. भेड़ों की उच्च नस्ल बीपीएल परिवारों को फ्री में पालन के लिए देने की तैयारी है. इतना ही नहीं भेड़-बकरी बीमा योजना को अगले साल से पूरी तरह फ्री कर दिया जाएगा. बकरी का दूध औषधीय गुणों से भरपूर होता है इसलिए इसके उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी.
रोडमैप के तहत महिलाओं को डेयरी स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये तक का लोन ब्याज फ्री दिया जाएगा. वहीं बकरी और भेड़ पालन को बढ़ावा देने के लिए बीटल, सिरोही, मुंजल जैसी उच्च आनुवंशिक वाली बकरी की नस्ल पशुपालकों को को पालने के लिए दी जाएंगी. साथ ही पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए सैक्स सॉर्टेड सीमन की लैब राज्य में बनाई जाएगी.
साथ ही लैब और पशु चिकित्सा संस्थाओं में दवाओं और उपकरणों की कोई कमी न हो इसकी भी समीक्षा की जाएगी. गौशालाओं की सुविधाओं में सुधार पर भी जोर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि सरकार का मकसद है कि हर पशुपालक आत्मनिर्भर बने और पशुपालन हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने.
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