अविकानगर और बुंदेलखंड नेचुरल्स एलएलपी के बीच एमओयू हुआ है. फोटो- Avikanagarराजस्थान और उत्तरप्रदेश के पशुपालकों तक अब भेड़-बकरी, खरगोशों के जर्मप्लाज्म के चयन और उनकी मार्केटिंग तकनीक पहुंचेगी. इसके लिए बुंदलेखंड नेचुरल्स एलएलपी और आईसीएआर-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के बीच एक एमओयू साइन किया गया है. ये एमओयू अविकानगर के एग्री-बिजनेस एनक्यूबेशन सेंटर (एबीआईसी) के बीच हुआ है. अविकानगर के डायरेक्टर डॉ अरुण कुमार तोमर ने जानकारी दी कि एमओयू का मुख्य उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में भेड़-बकरियों और खरगोशों के विशिष्ट जर्मप्लाज्म के चयन, प्रसार और विपणन से संबंधित उन्नत तकनीक को सम्बंधित क्षेत्र के किसानों तक पहुंचाना है. बुंदेलखंड क्षेत्र में कम से कम संसाधनों और वहां की भौगोलिक परिस्थिथियों में भेड़-बकरी एवं खरगोश का पालन आसानी से किया जा सकता है.
इस एमओयू के माध्यम से अनुसंधान तकनीकियों को संभावित ग्रामीण युवाओं तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग मिलेगा. इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में छोटे पशुओं के पालन को प्रोत्साहित किया जा सकेगा.
एमओयू के लिए नेचुरल्स एलएलपी के अधिकारियों ने पहले अविकानगर का भ्रमण किया. उन्होंने संस्थान के विभिन्न विभागों का दौरा किया और वहां किए जाने वाले अनुसंधानों एवं कामों को समझा. इन अधिकारियों ने संस्थान के एलपीटी डिवीजन, एफटीयू डिवीजन, एबीआईसी और टीएमटीसी डिवीजन, सेक्टर-12, सेक्टर-9 और बकरी यूनिट का दौरा भी किया. साथ ही बुंदेलखंड के हिसाब से हो सकने वाले कामों के बारे में भी समझा.
एमओयू के दौरान संस्थान निदेशक डॉ. अरूण कुमार तोमर, बुंदेलखंड नेचुरल्स एलएलपी (उत्तर प्रदेश) के निदेशक असलम खान, सलीम खान, संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी इंद्रभूषण कुमार, सह-प्रधान अन्वेषक व वैज्ञानिक एबीआईसी डॉ. अरविन्द सोनी मौजूद रहे.
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एमओयू से पहले हाल ही में अविकानगर में आठ दिवसीय "वैज्ञानिक पद्धति से भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन" पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया गया है. इसमें महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड राज्यों के 32 पशुपालक और किसानों ने भाग लिया. प्रशिक्षण में भाग ले रहे सभी किसानों को भेड़-बकरी पालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. ताकि वे अपने गृह जिलों में जाकर भेड़-बकरी पालन को एक बिजनेस में बदल सकें.
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इस ट्रेनिंग वर्कशॉप में अविकानगर संस्थान के निदेशक डॉ अरुण कुमार तोमर ने किसानों को भेड़-बकरी पालन के संदर्भ में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आज बदलते जलवायु परिवर्तन में किसानों के लिए भेड़ -बकरी एटीएम है. सही नस्ल के पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से पालन किया जाए तो किसानों की आर्थिक तरक्की मुमकिन है. इसके अलावा कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों एवं विभाग अध्यक्ष, वैज्ञानिकों ने भी किसानों को ज्यादा से ज्यादा प्रायोगिक रूप से भेड़-बकरी पालन पर जोर दिया.
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