बकरियों का बर्थडेउत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक ऐसा जन्मदिन मनाया गया, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है. टड़ियावां थाने के गौरा डांडा गांव में रहने वाले पशुपालक लालाराम श्रीवास्तव ने अपनी दो प्यारी बकरियों, 'स्वीटी' और 'मोनिका' का जन्मदिन किसी उत्सव की तरह मनाया. यह कोई साधारण आयोजन नहीं था, बल्कि इसमें पूरे रीति-रिवाज, भक्ति और भव्यता का संगम देखने को मिला. हालांकि, पशुपालक ने बीते साल भी इसी तरह अपनी बकरियों का बर्थडे मनाया था.
दरअसल, टड़ियावां थाने के पशुपालक लालराम एक बार फिर से चर्चा में हैं. इस बार भी इनकी चर्चा अपनी बकरियों के जन्मदिन मनाने की है. 14 जनवरी की रात के आयोजित इस कार्यक्रम के लिए लालाराम ने बाकायदा निमंत्रण पत्र छपवा कर ग्रामीणों को आमंत्रित किया था. जश्न की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों से हुई, जिसमें गांव में रामायण और भागवत पाठ का आयोजन किया गया, जिसके बाद बकरियों को नहला-धुला कर फूलों की मालाएं पहनाई गईं और नए कपड़े पहनाए गए.
इस जश्न में माहौल तब और रंगीन हो गया जब डीजे की धुनों पर गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग जमकर थिरके. लालाराम ने इस मौके पर करीब 200 लोगों के लिए शानदार दावत का इंतजाम किया था. खास बात यह है कि पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह 300 मेहमानों को बुलाकर जश्न मनाया था और 51 कन्याओं को भोज कराया था.
ग्रामीणों के लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि लालाराम के अटूट पशु-प्रेम की मिसाल है. पशुपालक लालाराम का कहना है कि स्वीटी और मोनिका उनके परिवार का हिस्सा हैं. आज के दौर में जहां लोग अपनों को भूल जाते हैं. वहीं, लालाराम का यह अनोखा कदम समाज को बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता और प्रेम का बड़ा संदेश दे रहा है.
ग्रामीण सोनू ने बताया कि पशुपालक लालाराम को अपनी बकरियों से इतना प्रेम है की वो हर हर साल अपनी बकरियों का जन्मदिन मनाते है. अभी भी कल जन्मदिन मनाया था, जिसमें दो सौ से ढाई सौ लोगों के खाना खिलाया, रामायण कराई भागवत कराई उन्हें अपनी बकरियों से बहुत प्रेम है. (प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)
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