सीएसडब्ल्यूआरआई अविकानगर में आयोजित जनजाति गौरव पखवाड़ा में 143 किसानों को कृषि व पशुपालन सामग्री वितरित की गई. कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के विचारों पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक तरीके से भेड़-बकरी पालन के लिए किसानों को मार्गदर्शन दिया गया.
ऊंटनी के बच्चों पर 20 हजार की सहायता राशि का वादा अधूरा, पशुपालक बोले– "अगर यही हाल रहा तो ऊंट पालन बंद करना पड़ेगा." राज्य सरकार की इस योजना के तहत ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है.
भीलवाड़ा जिले के बागजणा गांव में धर्म तालाब में पशुओं को पानी पिलाने के दौरान 13 वर्षीय सुनील नाथ डूब गया, उसे बचाने गई 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी और उसका 12 वर्षीय बेटा प्रवीण नाथ भी डूब गए. तीनों की मौके पर मौत हो गई.
Rajasthan Dairy: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक कार्यक्रम में कहा कि उनका टारगेट राजस्थान को केवल कृषि-प्रधान राज्य से आगे बढ़ाकर भारत का नंबर-1 डेयरी हब बनान है. उन्होंनेकहा कि उनकी सरकार ने मवेशियों, गोपालकों और किसानों के कल्याण के लिए "अभूतपूर्व कदम" उठाए हैं
खेरी नस्ल की मान्यता ने राजस्थान के भेड़ पालकों को नई दिशा दी है. यह नस्ल न केवल एक विशेष पशु संसाधन के रूप में उभरी है, बल्कि इसे वैज्ञानिक मान्यता मिलना भेड़ पालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. खेरी नस्ल को अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पंजीकरण में भी शामिल कर लिया गया है, जिससे इसके पालन और प्रजनन में और अधिक मदद मिलेगी.
अलवर के तिजारा, किशनगढ़बास, रामगढ़, गोविंदगढ़ और नौगांव क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो गाय का दूध बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. लेकिन कुछ चुनिंदा गोतस्करों के कारण मेव समाज के लोग परेशान हैं. लोगों ने कहा कि गलत करने वाले लोगों को सजा मिलनी चाहिए. लेकिन कुछ गलत लोगों के कारण और लोग भी परेशान होते हैं. अलवर के नंगलीवाल गांव में करीब 200 परिवार हैं. इसमें डेढ़ सौ के आसपास मुस्लिम परिवार हैं. सभी ज्यादातर गाय पालन करते हैं और गाय का दूध बेचकर अपने बच्चों का पेट भरते हैं.
राजस्थान में किसानों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के पास बकरी पालन का व्यवसाय करने का अच्छा मौका है. राज्य सरकार बकरी पालन योजना के तहत 5 लाख रुपये से लेकर 50 लाख तक का लोन दे रही है. इसमें लाभार्थियाें को 50 से 60 प्रतिशत सब्सिडी भी मिलेगी. जानिए योजना से जुड़ी जानाकरी.
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस ने पशुपालकों से दो रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदने की गारंटी दी है. यह योजना कांग्रेस ने अपनी छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर शुरू करेगी. किसान तक ने कांग्रेसी सूत्रों से इस योजना के बारे में जानकारी ली है.
पशुपालक सम्मान के लिए प्रदेश का कोई भी पशुपालक आवेदन कर सकता है. इसके लिए पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा संबंधित जिला कार्यालय संयुक्त निदेशक या उप निदेशक पशुपालन विभाग में भी आवेदन किया जा सकता है.
वेटनरी डॉक्टर एसोसिएशन के मीडिया इंचार्ज डॉ. नरेन्द्र जाखड़ इस बारे में किसान तक को विस्तार से बताते हैं. वे कहते हैं, “ड्यूटी के अलावा जो काम सरकार वेटनरी डॉक्टर्स से कराती है, वे एनपीए यानी नॉन प्रेक्टिस अलाउंस के दायरे में आते हैं. इसीलिए एनपीए वेटनरी डॉक्टर्स का हक है.
पशुचिकित्सकों की हड़ताल से सबसे ज्यादा नुकसान पशुपालकों का हो रहा है. बीते 20 दिन में प्रदेश में करीब 28-30 हजार पशुओं की मौत हो चुकी है. लेकिन बीमा कवर नहीं होने से इन्हें पशु बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाया है.
बुंदलेखंड नेचुरल्स एलएलपी और आईसीएआर-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के बीच एक एमओयू साइन किया गया है. ये एमओयू अविकानगर के एग्री-बिजनेस एनक्यूबेशन सेंटर (एबीआईसी) के बीच हुआ है.
कृत्रिम गर्भाधान के लिए 25 लाख पशुपालकों को सब्सिडी देने वाली योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत पशुपालकों को 50 प्रतिशत या 500 रुपये की सीमा तक सब्सिडी दी जाएगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के 25 लाख पशुपालकों को एक-एक पशु (गाय या भैंस) के लिए कृत्रिम गर्भाधान करवाने के लिए 50 प्रतिशत या 500 रुपये की सीमा तक सब्सिडी देने की स्वीकृत्ति दी है.
अब राजस्थान देश में पहला राज्य है जहां दो पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हैं. गुरूवार को इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है. बता दें कि इसकी घोषणा मुख्यमंत्री गहलोत ने बजट में की थी.
एनपीए की मांग को लेकर 16 सितंबर को राज्य के सभी पशुचिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहकर हर जिला मुख्यालय पर विरोध-प्रदर्शन करेंगे. साथ ही मांग नहीं माने जाने पर वेटरनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन और पशुचिकित्सक संघ ने संयुक्त आह्वान कर 18 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए ज्ञापन सौंपा है.
प्रदेश के करीब तीन हजार वेटनरी डॉक्टर पिछले 20 साल से एनपीए के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोई भी सरकार सुनवाई नहीं कर रही है. इससे पहले भी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जयपुर में 40 दिन का धरना दिया गया था. शुक्रवार को भी पशु चिकित्सकों ने धरना देकर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा.
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 1983 में प्रदेश में ऊंटों की संख्या 7.56 लाख थी. यह साल 2019 में गिरकर सिर्फ 2.13 लाख ही रह गई. राजस्थान ही नहीं देश भर में ऊंटों की संख्या में 37 प्रतिशत की कमी आई है. ये हैं गिरावट के मुख्य कारण साल 1990 के बाद देशभर में सड़कों में काफी विस्तार हुआ है.
नागौर जिले के परबतसर में हर साल भरने वाला यह पशु मेला सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में प्रसिद्ध है. मेले में प्रसिद्ध नागौरी नस्ल के बैल, मारवाड़ी ऊंट, घोड़ों के साथ-साथ भेड़-बकरी भी बड़ी संख्या में खरीद-बिक्री के लिए आती हैं.
राजस्थान का सीकर जिला प्रदेश का पहला जिला बना है जिसकी सभी ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सालय मौजूद है. पशु चिकित्सालय होने से पशुपालकों को काफी सुविधा होती है. उनके मवेशियों को नजदीक ही इलाज मिल जाता है.
राजस्व विभाग ने दो दिन पहले एक आदेश जारी कर देगराय ओरण की छह हजार बीघा ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड कर दिया है. देगराय ओरण करीब 60 हजार बीघे में फैला हुआ है. इसमे से सिर्फ 24 हजार बीघा ही राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज था. सांवता गांव के आसपास छह हजार बीघा को सरकार ने रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है.
राज्य सरकार ने पहले चरण में 41,933 पशुपालकों के खाते में 175 करोड़ 72 लाख रुपये ट्रांसफर भी कर दिए हैं. वहीं, दूसरे चरण में बचे हुए पशुपालकों को राशि देनी है. पशुपालन विभाग का कहना है कि अगले 15 दिनों में यह काम पूरा हो जाएगा.
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