सीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तकबकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी के बकरे को घर पर पालना अच्छा माना जाता है. यही वजह है कि रमजान और ईद से ही बकरों की खरीद शुरू हो जाती है. कुछ लोग बकरीद से दो-तीन महीने पहले से बकरा पालना शुरू कर देते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो रमजान और ईद आते ही बकरे खरीदकर घर पर पालना शुरू कर देते हैं. लेकिन शहरी मामले में ऐसे बकरों को पालने में सबसे ज्यादा परेशानी चारे और चारागाह की आती हैं. क्योंकि सवाल यही उठता है कि शहर में बकरे-बकरियां पालें तो फिर उन्हें चराने कहां ले जाएं.
क्योंकि अब शहर तो छोडि़ए गांव में भी चारागाह कम हो गए हैं. इसी परेशानी का सामना कुर्बानी के लिए बकरे पालने वालों के साथ भी आती है. इसमे कुछ राहत स्टॉल फीड से मिल जाती है. लेकिन इस बारे में गोट एक्सपर्ट का कहना कुछ और ही है. एक्सपर्ट की मानें तो बकरे-बकरियों की एक नस्ल ऐसी भी है जिसे घर की छत पर भी पालकर कुर्बानी के लिए तैयार किया जा सकता है.
बरबरी नस्ल के बकरे-बकरियों की बड़ी पहचान उनके कान और रंग हैं.
बरबरी नस्ल के बकरे-बकरियों के कान ऊपर की ओर उठे हुए होते हैं.
बरबरी बकरी और बकरों के कान नुकीले, छोटे और खड़े होते हैं.
बरबरी बकरी बकरों का रंग सफेद रंग की खाल पर ब्राउन रंग के धब्बे होते हैं.
बरबरी बकरे-बकरी की नाक चपटी और पीछे का हिस्सा भारी होता है.
बरबरी बकरी 13-14 महीने की उम्र पर बच्चा देने लगती है.
बरबरी बकरी 15 महीने में दो बार बच्चे देती है.
बरबरी बकरी पहली बार में एक या दो बच्चे देती है.
दूसरी बार में बरबरी बकरी 90 फीसद दो से तीन बच्चे देती है.
10 से 15 फीसद तक बरबरी बकरी 3 बच्चे भी देती है.
बरबरी बकरी 175 से 200 दिन तक दूध देती है.
बरबरी बकरी रोजाना औसत एक लीटर तक दूध देती है.
बरबरी बकरा वजन में 25 से 40 किलो तक का हो जाता है.
देश के अलावा खाड़ी देशों में बरबरी बकरों की बहुत डिमांड है.
बरबरी बकरे को मीट के लिए बहुत पसंद किया जाता है.
सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और ईरान-इराक में बहुत डिमांड है.
बकरीद पर बरबरी बकरों के मुंह मांगे दाम मिलते हैं.
यूपी में- 38.96 लाख
मध्य प्रदेश- 5.88 लाख
कर्नाटक- 73.6 हजार
हरियाणा- 63.3 हजार
उत्तराखंड- 43.7 हजार
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