'1 करोड़ लीटर दूध रोजाना' का लक्ष्य, डेयरी सेक्टर में बिहार की बड़ी छलांग

'1 करोड़ लीटर दूध रोजाना' का लक्ष्य, डेयरी सेक्टर में बिहार की बड़ी छलांग

बिहार सरकार ने राज्य को डेयरी सेक्टर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए रोजाना एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. इस दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा के बिहारशरीफ में 20 मीट्रिक टन हर दिन क्षमता वाले हाईटेक दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया. लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट स्थानीय स्तर पर दूध के वैल्यू एडिशन, किसानों की आय बढ़ाने और सुधा ब्रांड को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा.

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'1 करोड़ लीटर दूध रोजाना' का लक्ष्य, डेयरी सेक्टर में बिहार की बड़ी छलांगबिहार में रोजाना एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य तय

बिहार सरकार ने राज्य में डेयरी क्षेत्र को नई गति देने के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित डेयरी परिसर में 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले अत्याधुनिक दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार में प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन हासिल करना है और इसके लिए जरूरी तकनीक, ट्रेनिंग और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकसित भारत के सपने को साकार करने में डेयरी सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उनके अनुसार डेयरी क्षेत्र में नई क्रांति समृद्ध, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बिहार की मजबूत नींव रखेगी.

15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक प्लांट

करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के शुरू होने के बाद नालंदा डेयरी में प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन अतिरिक्त दही उत्पादन संभव हो सकेगा. प्लांट में उच्च क्वालिटी वाले पैकेज्ड दही और लस्सी का उत्पादन किया जाएगा. वर्तमान में नालंदा डेयरी में दही और लस्सी उत्पादन के लिए अलग से कोई यूनिट नहीं है. इसके चलते शादी-विवाह और होली, छठ और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए अन्य जिलों की डेयरियों पर निर्भर रहना पड़ता है. नई यूनिट शुरू होने के बाद यह निर्भरता समाप्त होने की उम्मीद है.

किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि दही और लस्सी प्लांट बनने से स्थानीय स्तर पर दूध का वैल्यू एडिशन होगा, जिससे दुग्ध उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. डेयरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार सरकार और कॉम्फेड की उस नीति को और मजबूत करेगी, जिसके तहत केवल दूध की मार्केटिंग पर नहीं, बल्कि उसके दाम बढ़ा कर किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

पशुपालकों को मिलेगी आधुनिक सुविधा

सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, बेहतर ट्रेनिंग, उन्नत नस्ल के पशु, स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत डेयरी नेटवर्क उपलब्ध कराने पर काम कर रही है. इससे दूध उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि नालंदा को बिहार में दूध उत्पादन और डेयरी प्रोसेसिंग का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड चेन और मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क तैयार किया जाएगा.

बकरी पालन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए अलग फेडरेशन बनाया जाएगा. इस फेडरेशन के माध्यम से बकरी के दूध के कलेक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था तैयार की जाएगी. उन्होंने कहा कि इससे लाखों ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं की आय बढ़ेगी और डेयरी क्षेत्र का दायरा और अधिक बढ़ेगा.

‘सुधा’ को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सुधा ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहती है. इसके लिए क्वालिटी, आधुनिक तकनीक, वैल्यू एडिशन और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले साल में बिहार के डेयरी उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएंगे और राज्य के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा.

8 हाईटेक पशु परिवहन वाहनों को दिखाई हरी झंडी

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग के लिए तैयार किए गए 8 हाईटेक पशु उठाव और परिवहन वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. ये वाहन राज्य के आठ प्रमंडलों में तैनात रहेंगे और 24 घंटे पशु सेवा उपलब्ध कराएंगे. हरेक वाहन में चालक, वेटनरी डॉक्टर और पशुओं के लिए अलग केबिन, ऑटोमैटिक हाइड्रोलिक सिस्टम और 1500 किलोग्राम तक वजन वाले पशुओं को सुरक्षित ढंग से ले जाने की सुविधा मौजूद है. एक वाहन की लागत लगभग 38 लाख रुपये बताई गई है. पशुपालक इस सेवा का लाभ टोल-फ्री नंबर 1962 पर संपर्क कर पा सकेंगे.

डेयरी क्षेत्र को मिलेगा नया आयाम

नए दही-लस्सी प्लांट, बेहतर डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पशुपालकों के लिए आधुनिक सुविधाएं और बकरी पालन को बढ़ावा देने की योजनाओं के जरिए बिहार सरकार डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि इन पहलों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे और बिहार देश के प्रमुख डेयरी राज्यों में शामिल हो सकेगा.

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