
बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में एक बार फिर मौसमी हलचल तेज हो गई है. उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र और मजबूत होकर डिप्रेशन में बदल गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संभावना जताई है कि यह सिस्टम अगले 12 घंटों में और ताकतवर होकर डीप डिप्रेशन में बदल सकता है.
IMD के 28 सितंबर के राष्ट्रीय बुलेटिन के मुताबिक यह सिस्टम सुबह 5:30 बजे उत्तरी अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास 15.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 97.6 डिग्री पूर्वी देशांतर पर केंद्रित था. उस समय यह म्यांमार के मावलाम्याइन से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण और यांगून से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था. वहीं, भारत के अंडमान द्वीप समूह के मायाबंदर से इसकी दूरी करीब 590 किलोमीटर पूर्व-उत्तर पूर्व थी.
IMD के मुताबिक डिप्रेशन के उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है. यह म्यांमार तट के साथ और उसके करीब से बढ़ते हुए उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे सटे बांग्लादेश तट की ओर जा सकता है. अगले दो से तीन दिनों तक सिस्टम के इसी दिशा में आगे बढ़ने का अनुमान है.
मौसम विभाग ने फिलहाल इस सिस्टम के डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई है. उपलब्ध मॉडल सिस्टम के बहुत ज्यादा तीव्र होने का संकेत नहीं दे रहे, लेकिन इसके रास्ते और तीव्रता पर लगातार नजर रखी जा रही है. सिस्टम के ट्रैक और तीव्रता के पूर्वानुमान को लेकर IMD ने भरोसे का स्तर मध्यम बताया है.
इस मौसमी सिस्टम का असर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मौसम पर भी दिखाई देगा. IMD ने 28 सितंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ज्यादातर स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ जगह भारी बारिश होने की संभावना जताई है.
मौसम विभाग के पोर्ट ब्लेयर केंद्र के पूर्वानुमान में भी 28 सितंबर को उत्तरी और मध्य अंडमान में कई स्थानों पर बारिश और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है.
बारिश के साथ तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है. IMD के अनुसार 28 सितंबर को अंडमान द्वीप समूह में गरज-चमक के साथ हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है.
अंडमान सागर और पूर्व-मध्य व दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के आसपास के समुद्री इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं चलने और झोंकों के 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है. म्यांमार तट के आसपास 28 सितंबर की शाम से 30 सितंबर की शाम तक हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है.
मौसम विभाग ने समुद्री स्थिति को लेकर भी चेतावनी जारी की है. अंडमान सागर और पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी से लगे इलाकों में समुद्र Rough to Very Rough, यानी खराब से बेहद खराब रह सकता है. म्यांमार तट के आसपास भी ऐसी ही स्थिति बनने की संभावना है. इसके बाद 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान बांग्लादेश तट और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के आसपास समुद्र में खराब स्थिति रह सकती है.
28 सितंबर की सुबह जारी समुद्री बुलेटिन में उत्तरी अंडमान सागर में 25 से 30 नॉट की हवाओं के साथ झोंकों के 35 नॉट तक पहुंचने और व्यापक बारिश या गरज के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बताई गई है.
इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मौसम को लेकर भी एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. IMD के मुताबिक मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों पर बना लो प्रेशर एरिया 28 सितंबर की सुबह कमजोर पड़ गया. हालांकि इससे जुड़ा ऊपरी हवा का चक्रवाती सर्कुलेशन पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से करीब 1.5 से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद था.
इसलिए उत्तरी अंडमान सागर में बने मौजूदा डिप्रेशन को सीधे उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों हुई भारी बारिश का कारण बताना सही नहीं होगा. दोनों अलग-अलग मौसमी सिस्टम हैं. IMD के ताजा विश्लेषण में अंडमान वाला डिप्रेशन फिलहाल म्यांमार और बांग्लादेश तट की दिशा में बढ़ने का अनुमान है.
जानकारों के मुताबिक, सबसे अहम बात यह है कि मौजूदा सिस्टम को अभी चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) नहीं कहा गया है. 28 सितंबर की सुबह तक IMD ने इसे डिप्रेशन की श्रेणी में रखा है और अगले 12 घंटों में इसके डीप डिप्रेशन बनने की संभावना जताई है.
ऐसे में फिलहाल किसी चक्रवात के नाम या उसके भारत के मुख्य भूभाग से टकराने की बात नहीं कही गई है. मौसम विभाग सिस्टम की दिशा और ताकत पर लगातार नजर रख रहा है. मौजूदा पूर्वानुमान के मुताबिक इसका संभावित रास्ता म्यांमार तट के साथ उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर, फिर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे सटे बांग्लादेश तट की तरफ है.