ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार: महानदी से कई जिलों में बढ़ा खतरा! CM ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया

ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार: महानदी से कई जिलों में बढ़ा खतरा! CM ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया

ओडिशा में भारी बारिश के बाद 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंजाम और कोरापुट के प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया. हीराकुड बांध के 24 गेट से पानी छोड़ा जा रहा है. महानदी में 8 लाख क्यूसेक तक पानी पहुंचने की आशंका से कटक, पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर और केंद्रापड़ा में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.

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ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार: महानदी से कई जिलों में बढ़ा खतरा! CM ने प्रभावित इलाकों का जायजा लियासीएम मोहन चरण माझी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा (फोटो/X@CMO_Odisha)

ओडिशा में लगातार भारी बारिश के बाद कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को गंजाम और कोरापुट जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया. उनके साथ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी और विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल भी मौजूद रहे. हवाई सर्वे के बाद मुख्यमंत्री कोरापुट के जयपुर पहुंचे, जहां उन्होंने अधिकारियों के साथ राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की.

महानदी का जलस्‍तर बढ़ने से कई जिलों पर खतरा

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत के मुताबिक, रविवार रात तक करीब 7 लाख क्यूसेक पानी महानदी में बहकर कटक के मुंडली तक पहुंच सकता है. सोमवार सुबह तक यह मात्रा बढ़कर 8 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की संभावना है. इससे महानदी की कई सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और कटक, पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर तथा केंद्रापड़ा के कुछ हिस्सों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.

हीराकुंड बांध के 24 गेट से छोड़ा जा रहा पानी

हीराकुंड बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद रविवार को दो और स्लूइस गेट खोल दिए गए. अब बांध के कुल 24 गेट से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है. बांध का जलस्तर 628.29 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसका पूर्ण जलाशय स्तर 630 फीट है.

दिलीप कुमार राउत ने कहा कि कटक जिले के बांकी, अथगढ़ और बादंबा के कई निचले इलाके रविवार को पानी में डूब सकते हैं. उन्होंने पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर और केंद्रापड़ा के निचले इलाकों में भी बाढ़ की आशंका जताई है.

70 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने शनिवार तक निचले इलाकों से 70 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. प्रभावित लोगों के लिए 395 राहत शिविर बनाए गए हैं. कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है.

हालिया डीप डिप्रेशन के प्रभाव से हुई भारी बारिश ने राज्य के 13 जिलों में जनजीवन प्रभावित किया है. इनमें बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, कालाहांडी, कोरापुट, नबरंगपुर, मलकानगिरी, क्योंझर, नयागढ़, कंधमाल, बोलांगीर और जगतसिंहपुर शामिल हैं.

बालासोर में तीन नदियां खतरे के निशान से ऊपर

तटीय जिले बालासोर में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. यहां तीन प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर रविवार सुबह 6 बजे जलेश्वर के राजघाट पर 11.68 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 10.36 मीटर है. 

नदी का पानी बढ़ने से भोगराई, जलेश्वर, बालीयापाल और बस्ता ब्लॉक के कई गांव प्रभावित हुए हैं. बालासोर में बुधबलंग नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. इसके अलावा कंसाबांसा, सोआ और गंगाहर जैसी छोटी नदियों में भी पानी का बहाव तेज हो गया है. इससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.

मयूरभंज जिले में भारी बारिश का असर सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान पर भी पड़ा है. पार्क प्रशासन ने देवकुंड पर्यटन स्थल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इलाके के कई झरनों और जलधाराओं में पानी का बहाव काफी बढ़ गया है.

जाजपुर और भद्रक में भी बाढ़ के हालात

जाजपुर और भद्रक जिलों से भी गंभीर बाढ़ की स्थिति की खबरें सामने आई हैं. प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा है. मुख्यमंत्री के हवाई सर्वे और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाई गई है.

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी नबरंगपुर जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने के लिए नाव से भी जायजा ले सकते हैं. इससे पहले हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के कारण उनके हवाई सर्वे में करीब दो घंटे की देरी हुई. (पीटीआई)

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