
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के बहटा गांव के प्रगतिशील किसान सतीश कुमार ने बरसात के मौसम में तरबूज की खेती कर सफलता की नई मिसाल कायम की है. 10वीं तक पास सतीश ने बताया कि बेंगलुरु से तरबूज का बीज अपने मित्र के जरिये मंगवाया था. फिलहाल एक बीघे में करीब 12 से 14 क्विंटल तरबूज के पैदावार होने की उम्मीद है. इडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में सतीश बताते हैं कि ऑफ सीजन तरबूज की खेती करना एक बहुत बड़ा चैलेंज था. हमने पहले से सोचा हुआ था, कि इस बार कुछ नया प्रयोग किया जाए. इसलिए आगरा, मथुरा, कासगंज समेत कई जिलों में तरबूज के विशेष किस्म हाइब्रिड विराट के बीज के लिए प्रयास कर रहा था.
इस दौरान आगरा के रहने वाले हमारे मित्र ने मुझे एक पैकेट हाइब्रिड तरबूज विराट का बीज दिया. इसके बाद आधुनिक तकनीक अपनाकर खेत में तरबूज की खेती शुरू की. बहटा गांव के प्रगतिशील किसान सतीश ने बताया कि खेत में करीब 3 किलोग्राम वजन के तरबूज तैयार हो गए हैं. वहीं बरसात के मौसम में भी फसल की पैदावार गर्मी के मौसम के आसपास ही रहने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि तरबूज की फसल 20 सितंबर तक तैयार हो जाएगी. दरअसल, यह समय तरबूज के सामान्य सीजन से अलग है. ऐसे में ऑफ सीजन होने के कारण बाजार में फसल का अच्छा दाम मिल जाएगा.
इस खास प्रयोग को देखने के लिए कासगंज समेत आसपास के जिलों के किसान भी सतीश के खेत पर पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि ऑफ सीजन होने के कारण 35 से 40 रुपए प्रति किलो तक रेट मिल जाएगा. सतीश के मुताबिक, बरसात के मौसम में अधिक नमी के कारण थ्रिप्स, माइट, डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याओं का खतरा रहता है. ऐसे मौसम में फसल की नियमित निगरानी और उचित देखभाल जरूरी होती है. वहीं, खरीफ के मौसम में तरबूज की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है. आज सतीश दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गए है.
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